नेपाल बार्डर पर पेट्रोल तस्करी ने नौजवानों को दे दिया काम, एक लाख युवा रोजाना कमा रहे औसतन दो हजार

October 17, 2015 5:01 pm0 commentsViews: 146

नजीर मलिक

apwaनेपाल में पेट्रोलियम पदार्थें की आपूर्ति पर मधेसियों ने नाकेबंदी क्या की, बेरोजगार नौजवानों के दिन बहुर गये हैं। सीमा से सटे दोनों तरफ के नौजवान मोटरसाइकिलों के सहारे भारत से पेट्रोल लेकर नेपाल में उतारते हैं। इसमें उन्हें दो हजार रोजाना की कमाई हों रही है। तस्करी का तरीका भी ऐसा कि पुलिस कोई भी कार्रवाई करने की हैसियत में नहीं है।

भारत-नेपाल सीमा पर आज कल हजारों मोटर साइकिलें इस पार से उस पार दिन भर दौड़ती हैं। नये लड़के अपनी मोटर साइकिलें लेकर सीमा से सटे बार्डपुर, शोहरतगढ, बढनी, लोटन आदि भारतीस इलाकों के पेट्रोल पंपों ़में अपनी मोटर सायकिलों में टंकी फुल कराते हैं। फिर उसे नेपाल में खाली का दुबारा भारत आ जाते हैं।

यह नौजवान भारत-नेपाल के बीच दिन भर में चार चक्कर लगाते हैं। एक चक्क्र में वह दस से बारह लीटर ईंधन भरते हैं। एक लीटर उनका आने जाने में खर्च होता है। इस प्रकार वह नौ लीटर में प्रति लीटर 70 रुपये की दर से से 630 रुपये कमाते हैं। एक दिन के चार चक्क्र में वह कम से कम दो हजार आसानी से कमा लेते हैं।

कपिलवस्तु पोस्ट को खबर मिली है कि 17 सौ किमी. लम्बी भारत-नेपाल सीमा पर दोनांे देशों के कम से कम एक लाख लोग तस्करी के इस धंघे में लगे हुए हैं। चूंकि नेपाली दुपहिया वाहनों के आने जाने पर कोई कस्टम नहीं है, इसलिए नेपाली लड़के इसमें अधिक लगे हैं।
कानून के मुताबिक भारत की पुलिस या अन्य सुरक्षा एजेंसिंयां बाइक कीं टंकी में भरे पेट्रोल को चेक नहीं कर सकती हैं। इसलिए तस्करों को कानूनन कोई दिक्कत नहीं है।

यह तस्कर ही नेपाल की पूरी पेट्रो ईंधन व्यवस्था संभाले हुए हैं। मजे की बात है कि इस तस्करी में उन मधेसी परिवारों के बच्चे भी शामिल हैं, जो नेपाल के खिलाफ नाकेबंदी आंदोलन में शामिल हैं।

पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी का कहना है कि भारत नेपाल की संधि के मुताबिक ऐसी बाइकों को रोकने का कोई प्राविधान नही है। इसलिए वह चाह कर कुछ कर पाने में असमर्थ हैं।

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