स्मैक के धंधे में पूर्वांचल का हब बना शोहरतगढ़, अब तक हो चुकी दर्जनों मौतें

November 10, 2018 5:41 pm0 commentsViews: 421

— बाराबंकी से लाई जाती है नशे की यह पुड़िया, लोग पी रहे हैं खतरनाक जहर

निज़ाम अंसारी

शोहरतगढ़ , सिद्धार्थ नगर।   शोहरतगढ़ कस्बे में जानलेवा नशे की पुड़िया “स्मैक” के सौदागरों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। लेकिन दीपावली के धूमधड़ों के बीच उन्होंने अपना व्यापार और तेज कर दिया है। ये वही स्मैक है जिससे कस्बा सालों  से लड़ता आ रहा था। लेकिन पिछले चार साल से इस व्यापार में कमी आई थी, परंतु उसके बाद से फिर  लेकिन फिर से मौत के सौदागर मुकामी नौजवानों के जान लेने और उन्हें बर्बा करने  पर पर आमादा है। इन धंधेबाजों के चलते अब तक सैकड़ों युवा मौत की गोद में जा चुके हैं और प्रशासन इसके खिलाफ कोई निर्णायक करने को तैयार नहीं दिखता। इनका धंघ पूरे पूर्वाचल में अपना नेटवर्क बना चुका है।

पुलिस मित्र का कार्ड पा चुके हैं समैकिए

सूत्रों का कहना है कि कस्बा शोहरतगढ़ के एक दर्जन सफेद पोश नेता कार्यकर्ता और कुछ सभासद ,बिज़नेस मैन संगठित तरीके से इस जहर को बड़ी होशियारी और सधे अंदाज में कर रहे हैं। देखने में किसी का किसी से लेना देना नहीं एक बेहतरीन पेशेवर की कड़ी की तरह यह जहर पिछले चार महीनों से बेचते चले आ रहे हैं। एक फ़ोन पर काम होता है अब इतने बड़े पकड़ वाले दर्जन भर लोगों को बेनकाब करना चुनौती पूर्ण हो गया है फिर भी चोरी तो छुपती है नहीं स्मैक का एक पूड़िये का दाम दो सौ ,तीन सौ और पांच सौ रखा गया है। इन लोगों का थाना शोहरतगढ़ में जबरदस्त पकड़ भी है यही नहीं इन लोगों ने बाकायदा पुलिस मित्र का खिताब भी पा लिया है जो धंधे को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल भी हो रहा हैं

नेपाल भी जता है यहां से स्मैक

स्मैक की खेप कस्बे से नेपाल तक पानी की गाड़ियों के साथ साथ पंद्रह से बीस किलो तक चावल आदि ले जाने वाले छोटे टाइप के कैरियर का इस्तेमाल होता हैA यह स्मैक बाराबंकी जिले से भारत और नेपाल भोजा जाता है।  बाराबंकी से आया स्मैक  शोहरतगढ़ (भारत) से नेपाल पहुँच कर हजार ,पंद्रह सौ और दो हजार में बिक रहा है निकटतम जिला नेपाल का कपिलवस्तु के नव युवकों को जब वहां स्मैक मंहगा लगता है या डिमांड बढ़ जाती है तो बाइक से सीधे शोहरतगढ़ कस्बे में आकर स्मैक के डीलरों से फ़ोन पर बात करके नगर के आर्य नगर के सुनसान उत्तरी इलाके में बुलाकर उसे हैंडओवर किया जाता है ।

गरीब स्मैकियों के लिए भी है व्यवस्था

छोटे आय वर्ग के नशेड़ियों को यह कम रेट में उपलब्ध न हो पाने से उनमें रोष व्याप्त है । स्मैक के कारोबारियों की इतनी पकड़ है कि तीन पुलिस वाले हमेशा   इन समाज के दुश्मनों को सलामी देकर अपना कर्तव्य पूरा करते हैं । कस्बा स्मैक के कारण पहले ही बहुत लहू लुहान हो चुका है कि स्मैक का नाम सुनते ही उनके दिमाग में नल के हत्थे से लेकर चारपाई के चप्पल और स्कूल के पंखे और बल्ब कैसे गायब हो जाते थे  साथ ही साथ लड़ाई दंगा का सीन चालू हो जाता है ऐसी स्थित में अगर स्मैक के कारोबारियों को वर्तमान समय में समय रहते कानून का शिकंजा नहीं पहनाया गया तो आम जनता आज नहीं तो कल प्रसाशन को चुनौती देने ही वाली है।

दीपावली की मिठास के बीच जनता में घुलता स्मैक का जहर

बताते चलें कि कुछ कांस्टेबलों की उम्र इस थाने पर ज्यादा हो गई है और कुछ कलाकार भी हैं जो संगठित अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं रोज दावतों का दौर होता है यही नहीं अभी गनीमत है कि इन नेताओं कार्यकर्ताओं। और नामी बिजनेसमैनों का विलय अभी तक किसी विधायक या सांसद या भावी प्रत्याशियों के साथ नहीं हो पाया है फिलहाल दलबल के साथ अपने आपको बेचने के तत्पर दिखते हैं। यदि कहीं विलय हो जाएगा तो इन मौत के सौदागरों को पकड़ना और भी मुश्किल हो जाएगा ।

 

 

 

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