Excludive- सपा बसपा का संयुक्त वोट सदा भारी रहा डुमरियागंज संसदीय सीट पर

January 31, 2019 6:04 pm0 commentsViews: 1483

— डुमरियागंज लोकसभा सीट

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। जिला सृजन के बाद से अब तक के 9 लोकसभा चुनावों में 6 बार भाजपा की जीत हुई है। वर्ष 1989 में जनता दल से गठबन्धन के चलते भाजपा चुनाव मैदान से दूर रही तो  1991 के चुनाव में उसे वोटों के बिखराव के कारण जीत हासिल हुई। 1996 में बसपा पहली बार गंभीरता से चुनाव मैदान में उतरी,। उस समय से सभी लोकसभा चुनाव में जीत किसी को भी मिली हो, मगर सपा और बसपा के कुल वोटों का योग भाजपा पर भारी रहा है।  ‘पहली बार लोकसभा चुनाव में सपा बसपा का गठबंधन हुआ है, ऐसे में देखना दिलचस्होगा कि सपा बसपा के एक होने पर आंकड़े क्या कहते हैं।

1989 के चुनाव में तो डुमरियागंज सीट से भाजपा चुनाव लड़ी ही नहीं थी। 1991 के चुनाव में बसपा लगभग थी नहीं। बीजेपी के मुकाबले सपा के बृजभूषण तिवारी, कांग्रेस की मोहसिना किदवई, जानता दल से रफीक अहमद, कांग्रेस अर्स से सीमा मुस्तफा लड़ कर वोटों को आपस में बांट रही थीं। ऊपर से मंदिर आंदोलन के चलते बीजेपी के पक्ष में ध्रुवीकरण भी था। लिहाजा बीजेपी के रामपाल सिंह बड़े आराम से जीत गए। 96 में सपा से 1.79 लाख वोट पाकर बृजभूषण तिवारी जीते जबकि बसपा के अजीजुर्रहमान को 74888 वोट मिले।

1998 के मध्यावधि चुनाव में बसपा से कमाल युसुफ उम्मीदवार हुए, जिन्हे 176478 वोट मिले, जबकि  बृजभूषण तिवारी को 161722  वोट मिले। कुल मिला कर दोनों को 3 लाख, 38,वोट मिले, मगर 250869 वोट पाकर बीजेपी के रामपाल सिंह चुनाव जीत गए। जबकि सपा बसपा का संयुक्त वोट होने पर बीजेपी के रामपाल सिंह लगभग 90 हजार मतों से हार सकते थे।

ॽ1999 में  पुनःमध्यावधि चुनाव हुए। भाजपा के रामपाल  सिंह 198263  पाकर  फिर चुनाव जीत गए। सपा के कमाल युसुफ को 151444 तथा बसपा के सुरेन्द्र यादव को 96147 मत मिले। यानी अगर सपा बसपा मिल कर लड़ते तो भाजपा  के विजेता रामपाल सिंह से गठबन्धन का  49 हजार वोट अधिक होता।  यही हालत 2004 भी रही। हालांकि इस जीत में मुस्लिम वोटो का बसपा के विजेता प्रत्याशी मो मुकीम के पक्ष में जबरदस्त ध्रुवीकरण रहा। यदि इसमें सपा का भी वोट जुड़ जाता तो जीत का अंतर बहुत अधिक होता।

2009 के चुनाव में  बीजेपी प्रत्याशी को मिले 1 लाख 53 हजार वोट मिले मुकाबले में सपा बसपा को।संयुक्त रूप से तकरीबन दो लाख मत मिले। इस बार कांग्रेस के जगदंबिका पाल को 229872 मत पाकर जीते, लेकिन यहां एक मुस्लिम जाबिर खा को 79820 वोट मिल गए। 2014 में भी यही हालत रही।  बीजेपी से जगदंबिका पाल जीते, मगर सपा बसपा और पिपा का संयुक्त वोट भाजपा से भारी रहा।

कुल मिलाकर डुमरियागंज में सपा और बसपा का संयुक्त वोट बीजेपी के वोट से सदा अधिक रहा है, इस बार सपा और बसपा गठबंधन कर एक होकर लड़ेंगे। ऐसी हालत में आंकड़ा तो गठबंधन के पक्ष में है, मगर सही परिणाम तो पोलिंग के बाद पता  चलेगा।

 

 

 

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