Exclusive- डुमरियागंज सीट को लेकर कांग्रेस के पास कई रणनीति, अंदरखाने में रहस्य, का माहौल

March 2, 2019 2:46 pm0 commentsViews: 2353

— पीस पार्टी के डा. अयूब ने दबाव बनाया तो उन्हें लड़ने से रोक नही सकेगी कांग्रेस पार्टी

— विषम परिस्थति में यहां से रणनीति के तहत कमजोर प्रत्याशी उतर सकते हैं राहुल गांधी  

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। कांग्रेस पार्टी में डुमरियागंज लोकसभा सीट से टिकल के लिए भागदौड़ करने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। ऊपर से पीस पार्टी का दबाव भी एक समस्या है। कांग्रेस के कई दिग्गजों और खुद हाई कमान की नई रणनीति के तहत संभव है कि कई दिग्गजों को यहां से निराश होना पड़े। कांग्रेस पार्टी के पूर्व सांसद मुहम्मद मुकीम का खेमा सारे हालात पर बारीकी से नजर रख रहा है।टिकट कटने की सबसे बड़ी आशंका पूर्व सांसद मुकीम को ही है, ऐसा माना जा रहा है।

दो माह पूर्व तक डुमरियागंज सीट से मुहम्मद मुकीम का टिकट बिलकुल पक्का माना जा रहा था। उन्हें पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री व कांग्रेस के सीनियर नेता नर्वदेश्वर शुक्ल और पूर्व विधायक ईश्वर चन्द्र शुक्ल के प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन ज्यों ही प्रियंका गांधी का राजनीति में पदार्पण हुआ, बाद में पीस पार्टी से कांग्रेस का तालमेल बना तो इस सीट से कांग्रेस के टिकट के दावेदारों की भीड़ लग गई।

बताया जाता है कि पूर्व सांसद मुकीम के मुकाबले पहले केवल ईश्वर चन्द्र व नर्वदेश्वर शुक्ल ही थे, लेकिन अब कुछ नये चौंकाने वाले नाम सामने आये हैं। कांग्रेस के अंदरखाने की खबर के मुताबिक कांग्रेस नेता सच्चिदानंद पांडेय, व पूर्व विधायक पप्पू चौधरी भी नये दावेदार बनके उभरे हैं। सच्चिदा पांडेय ने शायद प्रियंका के आने पर महिलाओं को टिकट में वरीयता को ध्यान में रख कर अपनी पत्नी का नाम आगे बढ़ाया है। पप्पू चौधरी एक जनाधार वाले नेता हैं। यह वह कई बार साबित कर चुके हैं।

इन नेताओं के अलावा पीस पार्टी के अध्यक्ष डा. अयूब की दावेदारी भी सामने है। कांग्रेस से तालमेल करने वाले डा. अयूब ने अगर इस सीट से लड़ने का दबाव बनाया तो कांग्रेस यहां से अपना उम्मीदवार हटाने को सोच सकती है। उसका कारण डा. अयूब का पीस पार्टी का अध्यक्ष होना है। समझौते के तहत किसी पार्टी के अध्यक्ष को चुनाव लड़ने के लिए इच्छित सीट न देना समझौते की दूसरी पार्टी के लिए मुश्किल होगी। ऐसी हालत आने पर पूर्व सांसद मुकीम डा. अयूब की जगह खुद टिक पायेंगे इसमें संदेह है।

उच्चस्तर पर एक चर्चा यह भी है कि गठबंधन से अलग रहने के बावजूद राहुल गांधी सपा बसपा की अधिकांश सीटों पर उनके उम्मीदवारों के मुकाबले उसी जाति का उम्मीदवार उतारने से बचने की रणनीति पर अमल कर सकते हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि ऐसी जगह जहां वोटों के विभाजन से सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस दोनो ही दलों के उम्मीदवारों के हारने की अशंका हो, वहां से राहुल कमजोर प्रत्याशी उतार कर गठबंधन के उम्मीदवार को वाक ओवर देना चाहते हैं, इसके पीछे की रणनीति यह है कि चुनाव बाद प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बहुमत के लिए गठबंधन का समर्थन प्राप्त किया जा सके।

फिलहाल यह कांग्रेस की रणनीति के हिस्सों में है। ऐसी तमाम रणनीति कांग्रेस के पास है। पूरे देश में किसी भी लोकसभा सीट के लिए कांग्रेस कौन सी रणनीति पर अमल करेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वह टिकट की घोषणा मार्च के मध्य से तीसरे हफ्ते के बीच करेगी। तब तक डुमरियागंज सीट पर कांग्रेस के टिकट को लेकर रहस्य और रोमांच बना रहा रहेगा।

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