Breaking News- मुख्तार अंसारी के साथी मफिया डान मुन्ना बजरंगी की जेल में गोली मार कर हत्या

July 9, 2018 1:35 pm0 commentsViews: 857

 

एस. दीक्षित

लखनऊ। पूर्वांचल के मफिया डान मुख्तार अंसारी के करीबी और सहयोगी प्रेम प्रकाश सिंह। उर्फ डान मुन्ना बजरंगी की आज सुबह 6 अजे के आसपास बागबत जेल के अंदर गोली मार कर हत्या कर दी गई। वह झांसी जेल में बंद थी, लेकिन उसे बागपत जेल स्थानांन्तरित कर दिया गया था। वह गाजीपुर के भाजपा विधायक कृष्णानंदराय की हत्या का भी मुख्य अभियुक्त था। एक मफिया डान की जेल में हुई हत्या से पूरे प्रदेश में सनसनी छा गई है।

मुख्तार अंसारी  व मुन्ना बजरंगी। बीच में मारे गये गाजीनुर के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय

बताया जाता है कि आज सुबह जब अनेक कैदी सो ही रहे थ्रो, अचानक मुन्ना बजरंगी की बैरंक में गालियों की तड़तड़ाहट गूंजने लगी। सू़त्रों के मुताबिक कुल दस फायरिंग हुई और मुन्ना बजरंगी ने मौके पर दम तोड़ दिया। उसकी हत्या का आरोप एक अन्य मफिया डान सुनील राठी गैंग पर लगाया जा रहा है। जेल में पिस्टल कैसे पहूंची, अभी यह भी रहस्य की ओट में है। फिलहाल जेलर और उिप्टी जेलर व 5 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

बता दें कि बागपत जेल के लिए स्थांतरित होने की खबर मिलते ही मुन्ना की पत्नी सीमा सिंह ने मीडिया से बात कर आरोप लगाया था कि उसके पति की हत्या िी जा सकती है। इसलिए उसने जेल स्थानांतरण का विरोध किया था। खुद मुन्ना बजरंगी ने अपनी जान का खतरा बताया था। उसके मुताबिक सत्ता पक्ष के एक नेता से उसे खतरा था।

कौन था प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी और  कैसे बना  माफिया डान

मुन्ना बजरंगी, ने मा़त्र 20 साल में की थी 40 हत्या।  90 के दशक में अपराध जगत में शामिल होने वाले मुन्ना बजरंगी की एक समय पूर्वी यूपी और बिहार के कुछ इलाकों में दहशत जोरों पर थी। .माफिया डान और मुख्तार अंसारी के दाहिने हाथ मुन्ना बजरंगी ने पूर्वांचल में दहशत और भय का माहौल पैदा करने में बड़ी भूमिका निभार्इ।

90 के दशक में उसकी दहशत पूरे पूर्वांचल और इससे सटे इलाकों में महसूस की जाती थी। वर्ष 2005 में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद से भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत छह लोगों की दिनदहाड़े हत्या कर दी। आइये जानते हैं, मुन्ना बंजरंगी  अपराध की दुनिया का बादशाह  कैसे बना।

छोड़ दी थी पांचवी के बाद पढ़ाई

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे मगर प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी को कुछ और करना मंजूर था। पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। जवानी में मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था। मुन्ना फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। 17 साल की नाबालिग उम्र में ही पहला मुकदमा दर्ज हुआ। जौनपुर के सुरेही थाने में पहला केस दर्ज हुआ था। मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा। वह अपराध के दलदल में धंसता चला गया।

अस्सी के दशक में की थी पहली हत्या
मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था। इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में दम दिखाया। उसके बाद उसने कई लोगों की जान ली।

मुख्तार अंसारी के गैंग में हुआ शामिल

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। यह गैंग पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद इस गैंग की ताकत बढ़ गई। मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था। वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था।

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