कमाल यूसुफ के शिवपाल के साथ जाने के मायने, क्या जिले के सियासी समीकरण बदलेंगे?

August 30, 2018 11:59 am0 commentsViews: 2081

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। समाजवादी पार्टी के दिग्गज रहे व बहुजन समाज पार्टी के टेम्प्रेरी नेता कमाल युसफ ने कल सांयकाल अपने पुराने साथी शिवपाल सिंह यादव का दामन थाम लिया। इससे जिले की राजनीति में उबाल आने की आशंका बढ़ गई है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी के कई नेता, कार्यकर्ता भी शिवपाल की नई पार्टी “समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा” में शामिल हो सकते हैं।

सपा सरकार में दो बार मंत्री और डुमरियागंज सीट से पांच बार विधायक रहे कमाल यूसुफ मलिक के समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा में जाने से शिवपाल यादव को बहुत बल मिला है। हालांकि गत चुनाव से ठीक पहले वे अखिलेश यादव के रवैये से क्षुब्ध होकर वे समाजवादी पार्टी छोड़ कर बसपा ज्वाइन कर चुके थे, लेकिन जानकार समझते थे कि यह उनका टेम्प्रेरी पड़ाव है। वे अनुकूल अवसर की प्रतीक्षा में थे। बहरहाल उनको सपा में जाने का अवसर तो न मिला, लेकिन सपा के एक स्तंभ द्धारा नई पार्टी बनाने के बाद उन्हें समाजवादी पार्टी के एक खेमे में जाने का अवसर मिल गया। दोनों में युवावस्था से मित्रता थी। आज पुरानी मित्रता दोनों के ही काम आ गई।

कमाल के शिवपाल के साथ जाने के निहितार्थ

कमाल के सपा में जाने के कई निहितार्थ हैं। मौजूदा हालात में सपा या बसपा में उनके टिकट के आसार नहीं बन रहे थे, न ही उनके परिवार के किसी सदस्य के लिए जगह बनने की संभावना रह गई थी। ऐसे में शिवपाल की नई पार्टी ने उन्हें आक्सीजन दी है और वे अब सिर्फ डुमरियागंज ही नही जिले की सभी सीटों में अपनी नई पार्टी का अपनी पसंद का उम्मीदवार उतरने की हैसियत में आ चुके हैं। मुमकिन है कि वे आगमी चुनाव में जीत की इमारत खड़ी कर सकें, लेकिन सेक्यूलर और मुस्लिम चेहरे के रूप में उनका नेतृत्व जिले में समाजवादी पार्टी की बुनियाद तो हिला ही सकता है। इससे वे अपने किसी परिजन को अपनी सियासी विरासत का वारिस तैयार करने का मौका भी पा सकते हैं।

उन्होंने कहा भी है कि अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह के पुराने साथियों के साथ बेहद बुरा सलूक किया है। लिहाजा अब सही मंच से आकर अखिलेश के चेहरे से नकाब उठाना आसान हो जायेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी लोकसभा सीट से उनका उम्मीदवार कौन होगा? सपा को भी इस पर नजर रखनी होगी। क्योकि पुराने सियासतदान के रूप में कमाल युसुफ सपा के हर दांव पेंच जानते हैं, वे सपा को नुकसान पहुचाने की कोई भी कोशिश कर सकते हैं।

बहुत खुश हैं शिवपाल यादव

पार्टी गठन के ही दिन कमाल यूसुफ मलिक के रूप में एक बड़ा मुस्लिम चेहरा पाकर शिवपाल यादव भी खुश हैं। वे कमाल यूसुफ का इस्तेमाल पूरे प्रदेश में करेंगे और इस प्रकार अकलियतों में अखिलेश यादव के खिलाफ संदेश देने की कोशिश करेंगे। शिवपाल के एक करीबी ने बताया कि सपा में ऐसे तमाम कद वाले और जनाधारी नेता हैं जो अखिलेश की उपेक्षा के शिकार हैं। वे जल्द ही समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा ज्वाइन करेंगे। कुल मिला कर समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा अपने मकसद में कहां तक कामयाब होगा, यह सितम्बंर महीने के अंत तक साफ हो जायेगा। लेकिन सिद्धार्थनगर में उनका दल तो अखिलेश को चुनौती देने की शक्ल में आ ही चुका है।

 

 

 

(1984)

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