पति की मौत के बाद परेशान पत्नी मालती देवी दो बच्चों के साथ दे सकती है जान, लिखा पत्र

October 4, 2018 1:38 pm0 commentsViews: 393

—- अमीर विवेक तिवारी की पत्नी को 45 लाख नकद समेत एक करोड़, गरीब भाजपा वर्कर कन्हैया के बच्चों को फूट कौड़ी भी नहीं

 

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। एक माह पूर्व एसएसबी जवान की गलती से ,विभाग की गाड़ी से हुई जोगिया-उदयपुर के भाजपा कार्यकर्ता स्व कन्हैया जायसवाल के बेसहारा परिजनों को भाजपा सरकार द्वारा वादा व भरोसा दिलाये जाने के बावजूद भी अभी तक नही मिली। जबकि लखनऊ में प्रावेट सैक्टर के अधिकारी विवेक की मौत के बाद उसके परिवार को ४५ लाख नकद के साथ लगभग एक करोड़ की आर्थिक सहायता दी गई। लखनऊ के विवेक अमीर थे और सिद्धार्थनगर में मरे कन्हैया जायसवाल भाजपा कार्यकर्ता थे, लेकिन दुभाग्य से गरीब थे। इसलिए कन्हैया की मदद करने वाला कोई नहीं है।अब उनकी पत्नी मालती जायसवाल निराश और आर्थिक तंगी के कारण अपने दो अबोध बच्चों के साथ जान देने की बात करने लगी हैं। पढिये पति की मौत के बाद पीड़िता मालती जायसवाल का दर्द।

कन्हैया जासवाल की मौत के बाद उनकी पत्नी मालती जायसवाल कहती है कि- मै आप सभी को अवगत कराना चाहती हूं कि विगत 1 सितम्बर को एसएसबी जवान की सरकारी गाड़ी से दुर्घटना होने पर हमारे पति की मृत्यु हो गयी। वो असमय काल के गाल में समा गए।जिससे मैं आहत हूँ, और आजीवन इस घटना से उबर पाना मेरे लिए सम्भव नहीं है। हमारे पति अपने पीछे 11 वर्ष की बच्ची अनन्या जायसवाल एवम 6 वर्षीय पुत्र अंश जायसवाल को छोड़ गए हैं।

मालती देवी के मुताबिक हमारे हंसते-खेलते परिवार को न जाने किसकी नज़र लग गई। हमारे परिवार में जीविका चलाने वाले एक मात्र हमारे पतिदेव थे, जिनका असमय चले जाना आजीवन खलेगा।  इस समय हमारा परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है, परिवार की माली हालत खस्ताहाल है। बच्चों के पठन-पाठन में बाधा उतपन्न हो रही है। इनका भविष्य क्या होगा सोचकर मेरी रूह कांप जाती है।

घटना के तत्काल बाद मौजूदा भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल एवं सत्तापक्ष के नेताओं द्वारा परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक मदद एवम जीवन-यापन के लिए सरकार द्वारा नौकरी दिलाने का आश्वासन किया गया था। लेकिन इस दुर्घटना के महीनों बीत जाने के उपरांत अभी भी किसी प्रकार की कोई सहायता नही प्राप्त हुई।

मैं बेसहारा अपने अनाथ बच्चों को साथ लेकर अधिकारीगण एवं  नेताओं के चौखट पर न्याय-मदद की गुहार लगाते-लगाते ,दौड़-दौड़ कर थक चुकी हूं। मुझे कहीं से किसी प्रकार की न्याय एवम मदद मिलने की कोई उम्मीद नही दिखाई दे रही है। आर्थिक तंगी से मजबूर अब मुझे कहीं से जीने की कोई उम्मीद नही दिख रही है। ऐसे में मदद न मिलने की दशा में अपने बच्चों के साथ खुदकुशी करने के अलावा मेरे पास कोई रास्ता नही, जिसके जिम्मेदार शासन-प्रशासन के लोग होंगे।

 

 

 

 

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