पिट गये समाजवादी शतरंज के सारे वजीर, प्यादों ने बचाई पार्टी की इज्जत

November 2, 2015 2:35 pm0 commentsViews: 447

नजीर मलिक

समाजवादी साइकिल

बिसात शतरंज की हो या सियासत की, मोहरों की बहुत अहमियत होती है। इस खेल में वजीर ताकतवर होता है। सिद्धार्थनगर के चुनाव में समाजवादी शतरंज की बिसात ही पलट गई। यहां तमाम वजीर एक-एक कर पिट गये। कुछ प्यादों ने आबरू रख ली, वरना पार्टी की बहुत जग हंसाई हो जाती।

यहां जिला पंचायत के सभी 48 वार्डों पर समाजवादी पार्टी ने समर्थित उम्मीदवार उतारे थे। इनमें अधिकांश बड़े चेहरे चुनाव में हार गये। हालत यह रही कि पार्टी के सबसे बड़े दिग्गज और दो-दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष व विधायक रहे मुहम्मद सईद भ्रमर भी हारते हारते बचे और वह अंत में बमुश्किल 60 मतों से जीत पाये।

जिले में सपा को सबसे बड़ी हार उत्तर प्रदेश विधानसभा अघ्यक्ष माता प्रसाद माता प्रसाद पांडेय के गृहक्षेत्र इटवा में मिली। यहां वार्ड नम्बर 14 से विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे के खासम खास और सपा के जिलाध्यक्ष झिनकू चौधरी के भाई राम सिंह चौधरी को बसपा के डाक्टर जुबैर ने करारी मात दी।

इटवा के ही अलग अलग वार्डों से वहां के विधान सभा क्षेत्र अध्यक्ष कमरुज्जमां और लोहिया वाहिनी के बबलू खान को भी तगडी शिकस्त मिली। इन तीनों हार से पार्टी सकते में है।

डुमरियागंज के वार्ड नम्बर 19 से पार्टी के जिला उपाध्यक्ष अफसर हुसैन रिजवी पूरे दम खम से मैदान में उतरे थे। वह सीनियर नेता थे और राज्यसभा सदस्य आलोक तिवारी के प्रतिनिधि भी थे। उन्हें हार ही नहीं मिली बल्कि, तीसरे स्थान पर रहना पड़ा।

नौगढ में वार्ड नम्बर 2 से चुनाव लड़ रही राज्य महिला आयोग की सदस्य जबैदा चौधरी को एक गुमनाम महिला श्रीमती देवी ने जबरदस्त मात दी। महिला आयोग की एक और सदस्य इंद्रसना त्रिपाठी ने वार्ड 43 से अपने पुत्र अमित त्रिपाठी को लड़ाया, मगर नतीजे में वह किसी नम्बर पर नहीं दिखे।

वार्ड नम्बर 41 से सदर विधायक विजय पासवान ने अपनी भाभी को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हे दूसरी सपा नेता शांति देवी पासी ने धूल चटा दी।

हालांकि चुनाव में समाजवादी पार्टी के खासे सदस्य जीत कर आये हैं, लेकिन बड़े चेहरों के प्रति जनता के गुस्से को समाजवादी पार्टी को समझना पड़ेगा। सपा के एक कार्यकर्ता का कहना है कि बड़े नेताओं द्धारा हर पद को अपने पास रखने की मंशा को पहचान लिया। इसलिए उसने खांटी कार्यकर्ताओं को समर्थन तो दिया, मगर बड़े चेहरों को घूल चटाने में तनिक भी नहीं हिचकिवाई।

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