भाजपा गठबंधन के साझीदार अपना दल ने चलाया “बाहरी हटाओ, जिला बचाओ” की मुहिम

January 22, 2019 3:40 pm0 commentsViews: 587

— क्या भाजपा गठबंधन के सहयोगी दल की इस मुहिम का मुख्य निशाना सांसद जगदम्बिका पाल है?

 नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। जिले की इकलौती लोकसभा सीट डुमरियागंज से “बाहरी भगाओ, ज़िला बचाओ” नामक मुहिम अब ज़ोर पकड़ने लगी है।  इस मुहिम में भाजपा सरकार की सहयोगी पार्टी अपना दल एस के खुल कर कूद पड़ने से सियासी गलियारों में हलचलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक टिप्पणीकार इसके अलग अलग अर्थ निकाल रहे हैं। लेकिन अभी तक सच की तह तक समझने में विफल हैं।

“बाहरी भगाओ, जिला बचाओ” का नारा 6 पूर्व डुमरियागंज टाउन के करीब बेवा चौराहे फेसबुक पर उठा था। उस मुहिम में तबसे लेकर अब तक तकरीबन 5 सौ लोग उसमें शामिल रहे। आम तौर से तब माना जा रहा है कि यह मुख्यतयः चंद मुसलमानों की आवाज है जो बसपा के प्रचारित प्रत्याशी आफताब आलम  पीसी पार्टी के अध्यक्ष डा. अयूब को किन्हीं भी वजह से पसंद नहीं कर रहे। मगर अब भाजपा सरकार की सझीदार पार्टी अपना दल एस ने इसे क्षेत्र में जबरदस्त मुद्दा बना लिया है।

बताया जाता है कि वर्तमान में “ बाहरी भगाओ, जिला बचाओ” के नारे के साथ अपना अपना दल के लोग जागरमकता अभियान शुरू कर रहे हैं। पिछले दिनों इसकी शुरुआत अपना दल एस की महिला विंग की जिलाध्यक्ष अंजलि चौधरी और पार्टी के यूथ विंग “ युवा मंच” के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत चौधरी ने गांवों में जनजागरण के साथ शुरू कर दी। उनके साथ पार्टी के जिलाध्यक्ष आत्माराम पटेल भी लगातार चल रहे हैं। तीनों संगठन मिल कर क्षेत्र में अब तक पचास से अधिक बैठकें कर चुके हैं। ऐसा उनका दावा है।

यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत चौधरी के मुताबिक अभी तक डुमरियागंज लोकसभा सीट से लगभग आधा दर्जन लोग चुनाव लड़ चुके हैं। सवाल है कि क्या जिले के तमाम दलों में स्थानीय स्तर पर योग्य प्रत्याशी नहीं हैं, दूसरे उनके जीतने से विकास ठप हो जाता है? कपिलवस्तु पोस्ट के सवाल, कि अब तक बाहरी प्रत्याशी के तौर पर इस सीट से अपना दल के सहयोगी दल भाजपा के जगदम्बिका पाल ही चुनाव जीते हैं और वह अब सही बस भी गये हैं? जवाब में हेमंत चौधरी कहते हैं कि घर बनाने से कोई स्थानीय प्रत्याशी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि चाहे जगदम्बिका पाल जी हो या बसपा के आफताब आलम या फिर पीस के डाक्टर अयूब आदि। वह उन सभी के खिलाफ हैं।

राजनीतिक प्रेक्षक अनुमान लगा रहे हैं कि संभवतः हेमंत चौधरी भाजपा गठबंधन में अपना दल कोटे से खुद यहां से टिकट के आकांक्षी हैं, इसलिए यह रणनीति अपना रहे हैं। इसके जवाब में  हेमंत चौधरी का कहना है कि मै ही क्यों, जिले का कोई भी व्यक्ति यहां से चुनाव लड़ सकता है, मगर दूसरे जिले से आये बाहरी लोग क्यों? वह भी अपने जिले से क्यों नही लड़ते?

आफताब ने कहा जनता किस पर भरोसा करती है, यह महत्वपूर्ण है

इस बारे में बसपा के घोषित उम्मीदवार आफताब आलम ने कहा कि भारत का संविधान इसकी इजाजत देता है कि कोई व्यक्ति लोकसभा चुनाव कहीं से भी लड़ सकता है। अटल बिहारी जी से लेकर तमाम लोग दूसरे जिलों से चुनाव लड़ते रहे। यह तो जनता तय करेंगी कि किस पर भरोसा करेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता को अपनी सेवा व विकास करने वाला प्रतिनिधि चाहिए, यह बात मायने नहीं रखती कि वह कहां का रहने वाला है।

 सांसद जगदम्बिका पाल समर्थक बोले

इस सवाल पर क्षेत्रीय सांसद जगदम्बिका पालसे सम्पर्क नहीं हो पाया, मगर उनके समर्थकों व भाजपा नेताओं का कहना है कि सांसद जी अब इसी जिले के हैं। जनता ने इसे मान लिया है। अपना दल एस नेता की यह मुहिम टिकट पाने का एक बचकाना और विफल प्रयास है। उन्हें चाहिए कि वह गठबंधन के निर्णय की प्रतीक्षा करें और जो भी फैसला हो उसका स्वागत करें। उन्हें जनता को भ्रमित करने का प्रयास बंद करना चाहिए।

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