सीएम योगी के इलाके में 23 गोवंशियों कि फिर हुई मौत, इस बार तूल पकड़ रहा मामला

January 15, 2018 11:57 am0 commentsViews: 241

विशेष संवाददाता

गोरखपुर। यूपी के सिद्धार्थनर में  पांच दर्जन गोवंशियों के मरने का मामला तो ऐन केन प्रकारेण  दबा दिया गया था, मगर  महराजगंज जिले के मधवलिया गो सदन में गायों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। गायों की मौत की खबर आने के बाद आनन-फानन में प्रशासन ने पोस्टमार्टम कराने के बाद मरी गायों को जेसीबी मशीन से गड्ढे खुदवा कर दफन करा दिया। प्रशासन अब यह कह रहा है कि गोसदन की एक भी गाय या बछड़े की मौत नहीं हुई है बल्कि गोरखपुर, देवरिया व अन्य स्थानों से भेजे गए 23 छुट्टा गोवंशीय पशुओं की मौत हुई है जो पहले से बीमार और कमजोर थे। महाराजगंज गारखपुर जिले का ही  हिस्सा है, जिसे बाद में जिले का दर्जा दिया गया।

महराजगंज जिले के निचलौल तहसील में मधवलिया गोसदन है। गो सदन के पास 500 एकड़ भूमि है। इसमें से 170 एकड भूमि को वार्षिक लीज पर देकर उसमे खेती करायी जाती है और उससे होनी वाली आय से ही गोसदन की व्यवस्था का संचालन होता है। इसके बावजूद गो सदन की दुव्र्यवस्था की खबरें जब-तब आती रही हैं।

13 जनवरी को सबसे पहले अमर उजाला अखबार ने मधवलिया गो सदन में एक सप्ताह में 29 गायों की मौत होने की खबर प्रकाशित की। इसके बाद एक न्यूज पोर्टल’ ने भी इस खबर को चलाया। इस पोर्टल ने 40 से 100 गायों की मौत बतायी। इसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और उसने गोसदन में जहां-तहां मरे पड़े गोवंशीय पशुओं के शव को जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर दफन करा दिया। इस सम्बन्ध में खबरे कई अखबारों के महराजगंज संस्करण में प्रकाशित हुई है।

यहां ध्यान देने की बात है गो रक्षा की बात करने वाली योगी सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहजिले के पड़ोसी जिले में दुव्र्यवस्था के चलते बड़ी संख्या में गायों की मौत की खबर को अखबारों ने प्रमुखता ने नहीं छापा। छापा भी तो इसे महराजगंज जिले के संस्करण तक ही सीमित रखा।
जब इस घटना की विस्तृत पड़ताल की  गई तो पता चला कि एक जनवरी से 14 जनवरी के बीच गोसदन में 23 गोवंशीय पशुओं की मौत हुई है। 11 जनवरी को 6 गोवंशीय पशुओं और 12 जनवरी को एक गाय की मौत हुई। 12 जनवरी को दो बाडों में सात गोवंशीय पशु मरे दिखाई दिए। तीन गाये अचेतावस्था में जमीन पर गिरी पडी थी। गोसदन के कर्मचारी मरी गायों के शव हटाने और अचेत गायों का उपचार कराने का कोई प्रयास नहीं कर रहे थे। जब उन्होंने पत्रकारों को तस्वीर लेते देखा तब वे सक्रिय हुए गायों को चारा-पानी देने लगे।

पशुओं के बाड़े के कुछ दूर ही गिद्धों का झुण्ड दिखा। वहीं पास में एक गड्ढे में एक साथ एक दर्जन गोवंशीय पशुओं के शव पड़े थे जिन्हें गिद्ध नोंच रहे थे। कुछ देर बाद गोसदन के सुपरवाइजर कमेलश मिश्र वहां पहुंचे लेकिन गोसदन में गायों की संख्या और गोवंशीय पशुओं की मौत के कारणों के बारे में वह कुछ बता न सके।
ग्रामीणों व कर्मचारियों ने बातचीत में बताया कि गोसदन में पशुओं के इलाज के किए अक्सर चन्द्रभान नामक व्यक्ति आता है। नये वर्ष में कोई भी पशु चिकित्सक यहां नहीं आया। गोसदन कर्मियों ने कहा कि अगर इलाज की बेहतर व्यवस्था होती तो कुछ गायों को बचाया जा सकता था। यह भी बताया गया कि काफी दिनों से गायों-बछड़ों को खाने के लिए महज भूसा ही दिया जा रहा है। हरा चारा, बरान या खरी नहीं दी जा रही थी। समुचित आहार नहीं मिलने से गोवंशीय पशु कमजोर होते गए। गोसदन की गायें तो जंगल किनारे चरने भी चली जाती है लेकिन यहां आए छुट्टा पशु खुद से चरने चरागाह नही जाते। उन्हें चरागाह ले जाने का भी प्रयास नहीं किया गया।

शनिवार को गोवंशीय पशुओं की मौत की खबर के बाद शनिवार को सीडीओ सिंहासन प्रेम व एसडीएम देवेश गुप्ता गोसदन आए। उसके बाद मरे पशुओं का पोस्टमार्टम कराया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी अवध बिहारी ने दो पशुओं के पोस्टमार्टम करने के बाद  उनके पेट में पालीथीन मिलने की बात बतायी।

याद रहे कि गत अगस्त महीने में सिद्धार्थनगर जिले में भी सीएम योगी के दौरे के तत्काल बाद पांच दर्जन गोवंशियों के मरने की बात सामने आई थी, मगर प्रशासन ने उसे जंगली पशु बता कर शासन को गुमराह किया या यों कहें कि मामले को दबा दिया गया। इस बार महाराजगंज में फिर उसी घटना की पुनरावृत्ति हुई। देखना है कि गोसेवक सीएम योगी जी इस पर क्या कदम उठाते हैं।

 

 

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