दीनी शिक्षा के आरोप में दो मुस्लिम शिक्षक निलम्बित, सवालों के घेरे में बीएसए

July 26, 2018 7:02 pm0 commentsViews: 585

 

 

नजीर मलिक

 “ पूर्वी यूपी के सिद्धार्थनगर जिले में कल दो मुस्लिम शिक्षक सस्पेंड कर दिये गये। आरोप है कि मतीउल्लाह व मो. अकमल नामक ये दोनों टीचर जिले के खेसरहा विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय देवरी में तैनात हैं और तकरीबन डेढ़ सौ बच्चों को उर्दू में मजहबी शिक्षा दे रहे थे।  बीएसए की इस कार्रवाई पर खुद शिक्षा विभाग के लोग ही सवाल उठा रहे हैं और उन्हें सत्ता का एजेंट बताया जा रहा है।”

सरकारी सू़त्रों के मुताबिक देवरी प्राइमरी स्कूल में मजहबी शिक्षा दिये जाने की शिकायत की गई थी। इसकी जांच करने बीएसए राम सिंह कल जांच करने गये थे। उन्होंने बच्चों को उर्दू पढते पाया और इसे मजहबी शिक्षा का नाम देते हुए स्कूल के दोनों अध्यापकों को मौके पर ही सस्पेंड कर दिया और मामले की जांच का आदेश करते हुए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अफसरों को सूचना भेज दी। सवाल है कि बीएसए ने किस आधार पर दावा किया कि वहां मजहबी शिक्षा दी जा रही थी, जबकि उन्हें उर्दू नहीं आती। वे बता नही पा रहे कि मजहबी शिक्षा क्या है।

उर्दू पढ़ाना अपराध नहीं

बताते हैं कि प्राइमरी स्कूलों में उर्दू शिक्षा पर रोक नहीं है। उर्दू शिक्षा किे लिए बकायदा उर्दू शिक्षक नियुक्त किये गये हैं। इसलिए उर्दू शिक्षा देना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। बीएसए राम सिंह का मानना है कि उनके निरीक्षण के दौरान बच्चे उर्दू में शिक्षा ले रहे थे। बीएससे को मालूम होना चाहिए कि उर्दू पढाना अपराध नही है। हां उर्दू को मजहबी शिक्षा कह कर निर्दोष अध्यापकों को दंड देना जरूर अपराध है।

बीएसए राम सिंह को यह बताना चाहिए कि अगर बच्चों को मजहबी शिक्षा दी जा रही थी तो वो कौन सी किताब है? अगर वो मजहबी किताब है तो अध्यापकों को कड़ा दंड देना चाहिए, लेकिन अगर वह उर्दू भाषा की पढाई है तो इस आधार पर अध्यापकों को दंड देने वाले बीएसए को शासन को स्वयं दंड देना चाहिए।

बीएसए ने कैसे तय किया कि किताबें मजहबिी शिक्षा की हैं

एक सबसे बड़ सवाल है कि उर्दू न जानने वाले बीएसए ने कैसे तय कर लिया कि उर्दू में लिखी किताबें मजहबी किताबें हैं। उस विद्यालय में हिंदू बच्चे भी पढ़ते हैं। अगर उन्हें केवल उर्दू ही पढाई जा रही है तो उनके अभिभावकों ने इसे कैसे मान लिया? कैसे वह हिंदी के बजाये मुस्लिम धर्म की शिक्षा पर इतजने दिनों तक  चुप्पी साधे रहे? इस बारे में लोग कहते हैं कि यह भाजपा नेताओं को खुश करने के लिए बीएसए रामसिंह की एक चाल है। अपनी कुर्सी का पाया मजबूत करने के लिए उन्होंने सिर्फ स्टंट किया है। जबकि उन्हें उर्दू का “अलिफ बे” तक नहीं पता। बीएसए साहब उर्दू एक लिपि है, इस लिपि में लिखीं हर किताबें मजहबी नहीं होतीं। इतना तो समझिये, इसलिए कि आप बेसिक शिक्षा अध्किारी हैं, न कि किसी पार्टी के एजेंट।

झूठ बोलते हैं बीएसए

बीएसए के दौरे के समय देवरी स्कूल की जो फोटो वायरल हो रही है उसमें साफ दिख रहा है कि एक टोपी पहने बच्चे के हाथ में उर्दू में निजामी नामक एक किताब है जो उर्दू की प्रारॅभिक शिक्षा की है। उसके पीछे एक बच्ची जो किताब लिए खड़ी है उसके हाथ में तिरंगा झंडा वाली किताब है। ऐसे में बेसिक शिक्षा अधिकारी किस आधार पर कह रहे हैं कि वहां एक मजहब की शिक्षा दी जा रही है। क्या बच्ची के हाथ में तिरंगा वाली किताब मुसलमान मजहब की है? बीएसए साहब क्या चाहते हैं आप?  आप देश की शिक्षा व्यवस्था को कहां ले जाना चाहते हैं, इतनी नफरत क्यों है उर्दू से ,जबकि यह यूपी में पढ़ाने के लिए सरकार द्धारा अधिकृत है।

 

 

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