Exclusixe- चिनकू यादव को बड़ा सियासी झटका, जिला पंचायत अध्यक्ष गरीबदास का पावर सीज

March 9, 2019 3:18 pm0 commentsViews: 3357

 

— जिला पंचायत अध्यक्ष के स्थान पर काम काज देखने के लिए प्रशासन ने गठित की त्रिस्तरीय कमेटी

—अध्यक्ष गरीबदास पर लगे वित्तीय अनियमितता की जांच बस्ती मंडल के कमिश्नर को  सौंपी गई

 

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। जिला पंचायत सिद्धार्थनगर (यूपी) अध्यक्ष गरीब दास पर वित्तीय अनियमितता सम्बंधी आरोप की जांच और उसी अधार पर कल्क्टर द्धारा रिपोर्ट करने पर शासन ने तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष गरीबदास का पावर सीज कर दिया है। इन अनियमितताओं की जांच बस्ती के कमिश्नर को सौंपी गई है। इस दौरान जिला पंचायत का काम काज देखने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। शासन के इस कदम को सपा नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि राम कुमार चिनकू यादव के लिए बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है।

दरअसल जिला पंचायत अध्यक्ष गरीबदास चिनकू यादव के घर ही रहते हैं। एक तरह से इनको चिनकू यादव का पाल्य कहा जा सकता है। पिछले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाने पर सपा नेता ले अपने पाल्य को लड़ा कर अध्यक्ष बनवा दिया। इससे पूर्व चिनकू की पत्नी अध्यक्ष थी। गत त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के दौरान चिनकू यादव अपने पिता को डुमरियागंज का ब्लाक प्रमुख भी बनवाने में कामयाब रहे थे। गरीबदास तो कहने को अध्यक्ष थे, तूती तो उनके प्रतिनिधि की ही बोलती थी।

जब ब्लाक प्रमुख पद से हटाये गये चिनकू के पिता

बहरहाल सपा का शासन जाते ही पहला हमला डुमरियागंज प्रमुख पद पर हुआ। बहादुरी से मुकाबला करने के बावजूद चिनकू याद अपने पिता मिठ्ठू यादव की ब्लाक प्रमुखी न बचा सके। सत्ता शासन के दबाव में उनके पिता खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करा दिया गया। ज्ञात रहे कि इससे पूर्व डुमरियागंज की प्रमुख इशरत जहां को हटाने के लिए चिनकू ने प्रयास किया था। नतीजतन जब उनके पिता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो पूर्व ब्लाक प्रमुख इशरत के परिजनों ने चिनकू का विरोध किया, इसे सत्ता पक्ष के ख्लाड़ियों का काम और आसान हो गया और चिनकू यादव को शिकस्त झेलनी पड़ी।

फिर शुरू हुई चिनकू की आर्थिक नाकाबंदी

सत्ता पक्ष के खिलाड़ियों को मिठ्ठू यादव की प्रमुखी छीन कर संतोष न हुआ। उनकी मंशा चिनकू की आय के श्रोतों को नष्ट कर उन्हें अर्थिक रूप से रीढ़विहीन करने की थी। ऐसे लोगों को पता था कि जिला पंचायत आय का श्रोत ही नहीं वरन यह विकास कार्य करा कर राजनीतिक लोकप्रियता हासिल करने का बड़ा माध्यम भी है। ऐसे में सत्ता पक्ष के खिलाड़ियों ने उनके इस दुर्ग को नेस्तनाबूद करने की ठानी। इसके पीछे मंशा थी कि मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में चिनकू को कमजोर कर ही हिंदुत्व की लीडरशिप तैयार की जा सकती है। इसके लिए अरसे से उनके पाल्य गरीबदास के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की कोशिश की जा रही थी, मगर किन्हीं कारणोंसे वह कामयाब नहीं हो पा रही थी।

अंत में अपनाया गया दूसरा रास्ता

गरीबदास के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की योजना परवान न चढ़ पाने के कारण सत्ता के उन्हीं खिलाड़ियों ने नई रणनीति बनाई। गरीबदास के खिलाफ कुछ जिला पंचायत सदस्यों ने वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाये। जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर ने वित्तीय अनियमितता की आंशंका की शासन को रिपोर्ट प्रेषित की और शासन ने अध्यक्ष गरीबदास के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाते हुए त्रिस्तीरीय समिति गठित कर दी। इसके अलावा गरीबदास के कृत्यों की जांच मंडलायुक्त को सौंप दी। जानकार बताते हैं कि जब तक जांच चलेगी तब तक गरीबदास का कार्यकाल समाप्त हो जायेगा। यानी चिनकू यादव की आर्थिक नाकेबंदी का काम पूरा कर दिया गया।

कौन-कौन है त्रिस्तरीय समिति में?  

जिला पंचायत अध्यक्ष गरीबदास पावर को जांच होने तक सीज कर दिये जाने के बाद वित्तीय एंवं प्रशासनिक कार्य के लिए तीन सदस्यों की कमेटी गठित कर दी गई है। इसमें जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता की पत्नी सुजाता सिंह, किसमाती देवी व कुसुमलता शामिल हैं। इस घटना के बाद से जिले के भाजपा खेमे में जोश का माहौल है। बहरहाल यह चिनकू यादव के छोटे से राजनीतिक काल का बड़ा झटका है। देखना है कि वे इसका मुकाबला कैसे करते हैं।

 

 

 

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