जाति-धर्म आधारित राजनीति के जहरीले दौर में मिसाल है शर्मा परिवार की दो खूबसूरत जीतें

May 6, 2021 2:03 pm0 commentsViews: 1893
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पोलिंग बूथ पर हमारी जाति की नहीं स्वयं हमारे घर का भी वोट

नहीं था, मगर धर्मनिरपेक्षता हमारी ताकत थी- प्रतीक राय शर्मा

नजीर मलिक

धर्मनिरपेक्ष जीत की मिसाल श्रीमती मिथिलेश राय शर्मा व आयुषी राय शर्मा

सिद्धार्थनगर। वर्तमान राजनीतिक दौर में हर तरफ जातिवाद और धर्मवाद का बोलबाला है, इस समीकरण को ध्यान में रख कर ही अक्सर लोग चुनाव के मैदान में उतरते है, लेकिन इटवा क्षेत्र  के जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र संख्या 22 से श्रीमती मिथिलेश राय शर्मा की जीत इस मायने में बेमिसाल कही जाएगी कि वह जिस क्षे़त्र से चुनाव चुनाव जीत कर आई हैं वह एक तो मुस्लिम बाहुल्य क्षे़त्र है दूसरे उस क्षेत्र में उनकी जाति तो वोट तो छोडिये स्वयं उनके परिवार तक का वोट नहीं है। इसके अलावा उनके गांव से उन्हीं की बड़ी बहू आयुषी राय शर्मा ग्राम प्रधान चुनी गई हैं। यहां भी अंतर केवल इतना था कि उनके परिवार का वोट जरूर था। शर्मा परिवार की यह जीत आज के साम्प्रदायिक एवं जातिवादी राजनीतिज्ञों के लिए एक मिसाल है।

श्रीमती मिथिलेश राय शर्मा भूमिहार वर्ग से आती हैं। उनका वार्ड मुस्लिम बाहुल्य है। पहले इस क्षेत्र में उनका गांव भी शामिल रहा करता था, परन्तु बाद के परिसीमन में उनका गांव बेलवा क्षेत्र से कट गया। जब वे चुनाव लड़ी तो पूरे क्षेत्र में उनकी जाति का एक भी वोट नहीं था। एक मात्र परिवार का वोट हो सकता था परन्तु नये परिसीमन में उनका गांव ही अलग क्षेत्र से जुड़ गया। इसके बावजूद श्रीमती  शर्मा ने परिवार की स्वच्छ छवि के बल पर नामांकन दाखिल किया और तौलेश्वर निषाद जैसे दिग्गज सपाई की मां ध्यानमती देवी, जिनका इस क्षेत्र में जातीय वोट बहुत था को तथा बसपा नेता नजरे आलम की पत्नी कयामुन्निशां को तीसरे और चौथे स्थान पर धकेल दिया।  उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्धंदी अंजलि को लगभग 2200 मतों से हाराया।इसके अलावा उनकी बहूं आयूषी राय ने ग्राम बेलवा से ग्राम प्रधान का नामांन दाखिल किया। इस गांव में बहुत मुस्लिम मतदाताओं का था। जाति के नाम पर उनके अपने परिवार का मा़त्र 6 वोट था। मगर वे अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने में सफल रहीं।

इटवा तहसील के बेलवा गांव की निवासिनी श्रीमती मिथिलेश राय शर्मा का परिवार रहता है। भूमिहार वर्ग के इस परिवार की छवि आज नहीं दशकों से स्वच्छ और निर्विवादित रही है। श्रीमती मिथिलेश राय शर्मा के श्वसुर स्व. शिवनाथ राय शर्मा ने सहकारिता से राजनीति शुरू की और बस्ती जिले के जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे। बाद में बस्ती से सिद्धार्थनगर अलग हुआ तो श्रीमती मिथिलेश राय शर्मा के पति सुधीर राय शर्मा ने जिला सहकारी बैंक का चुवा लगातार जीता। गत वर्ष सुधीर जी के देहावसान के बाद उनके पुत्र प्रतीक राय शर्मा ने डीसीबी अध्यक्ष पद संभाला। वह शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा के नेता हैं। दोनों चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़े और जीते गये।

इस परिवार की राजनीति में यह जीत वास्तव में बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। आज सामाजिक राजनीतिक माहौल विषैला होता जा रहा है। लोग धर्म के खाने में विभाजित हैं। धर्म के बाद लोग अपनी अपनी जातियों को गोलबंद करने में लग जाते हैं और जाति धर्म का जहर घोलते रहते हैं। ऐसे में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष प्रतीक राय शर्मा ठीक ही कहते हैं कि इंसानियत ही दुनियां का सबसे सच्चा धर्म है और हमारा परिवार इसी पर अमल करता है। धर्मनिरपेक्षता हमारी ताकत है, यही हमारी राजनीतिक सामाजिक पूंजी है।

 

 

 

 

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