शोहरतगढ़ः गोविंद माधव व सिद्धार्थ चौधरी के बीच कड़ी दोवेदारी, किसे उम्मीदवार बनायेगी भाजपा?

January 16, 2022 1:27 pm1 commentViews: 1764
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तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं सिद्धार्थ चौधरी की मां श्रीमती साधना चौधरी, पूर्व मंत्री स्व. धनराज यादव के पुत्र हैं गोविंद माधव

 

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। जिले की शोहरतगढ़ विधानसभा सीट को लेकर भाजपा उहापोह में है। गत चुनाव में यह सीट गठबंधन के करण अपना दल के खाते में गई थी, और यहां से अपना दल अनुप्रिया पटेल गुट के अमर सिंह चौघरी ने जीती थी। अमर सिंह इस समय सपा में शामिल हो चुके हैं। यही नही सीटों की मांग को लेकर अनुप्रिया पटेल और भाजपा के रिश्तों में खटास चल रही है। ऐसे में भाजपा ने इस सीट पर उम्मीदवार की तलाश शुरू कर दी है।

शोहरतगढ़ में भाजपा का इतिहास

शोहरतगढ़ सीट से भाजपा 1996 के बाद से कोई भी चुनाव नहीं जीत पाई है। 1996 में इस सीट से रवीन्द्र प्रताप उर्फ पप्पू चौधरी भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। उन्हें 46346 वोट मिले थे। उनके भाजपा छोड़ने के बाद इस सीट पर भाजपा की हवा सदा ही खरीब रही। 2002 के चुनाव में भाजपा ने साधना चौधरी को टिकट दिया तो उन्हें 26212 मत ही मिल सके और वे हार कर चौथे नम्बर पर रहीं। कुर्मी बाहुल्य इलाका हाने के कारण भाजपा ने 2007 के चुाव में भी साधना चौधरी पर ही दांव लगााया, मगर इस बार तो भाजपा की दुगर्ति ही हो गई और साधना चौधरी को मात्र 18455 मत ही मिल सके। 2012 में साधना चौधरी एक बार फिर प्रत्याशी बनीं तो उनका मत घट कर 16154 पर पहुंच गया। यानी लगातार तीन चुनावों में भाजपा प्रत्याशी साधना चौधरी के वोट घटते ही गये। 2017 के चुनाव में भाजपा की ओर से गठबंधन (अपना दल) प्रत्याशी अमर सिंह चौधरी विधायक बने।

गोविंद माधव की दावेदारी का आधार

2022 के चुनाव में शोहरतगढ़ सीट से भाजपा के लगभग आधा दर्जन नेताओं ने दावेदारी की है। इनमें कवल दो दावेदार ऐसे है जो चुनाव लड़ने में सक्षम है। प्रथम तो भाजपा के जिलाध्यक्ष गोविंद माधव का नाम है जो पिछले पांच वर्षों से क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय है। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता व मंत्री रहे स्व. धनराज यादव के पुत्र हैं। स्व. यादव की राजनीतिक छवि बेदाग और बेमिसाल रही है। यह जिले के आम आदमी समेत भाजपा नेतृत्व को अच्छी तरह मालूम है। यह उनकी साख का ही असर था कि उनके बाद उनके पुत्र गोविंद माधव को जनता के बीच पांव जमाने में कोई खास वक्त न लगा।

सिद्धार्थ चौधरी का आधार

इसके अलावा दूसरे दावेदार बढ़नी के ब्लाक प्रमुख सिद्धार्थ चौधरी हैं, जो लगातार तीन चुनाव हार चुकी साधना चौधरी के बेटे और केन्द्रीय मंत्री पंकज चौधरी के भांजे हैं। क्षेत्र में उनकी सक्रियता लगभग न के बराबर है। भाजपा के सूत्र बताते हैं कि फैसला इन्हीं दोनों के बीच होना है। उनके बारे में जनता मानती है कि अप्रत्यक्ष चुनाव लड़ने उनके परिवार का कोई सानी नहीं परन्तु जनता के बीच कम रहने की वजह से विधानसभा जैसा चुनाव जीतना उनके लिए कठिन है। यह कारण है कि सिद्धार्थ चौधरी की मां साधना चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव तो आसानी से जीत गईं, मगर विधनसभा चुनाओं में न केवल हारती रहीं वरन उनके मत भी निरंतर घटते गये।

पूर्व विधायक पप्पू चौधरी का पेंच

क्षेत्र में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भाजपा छोड़ कर कांग्रेस से भी विधायक बने पप्पू चौधरी को कांग्रेस पुनः प्रत्याशी बनाने जा रही है। भाजपा दावेदार सिद्धार्थ चौधरी उनके बेटे है और पारिवारिक विवादों के कारण मां के साथ अलग रहते हैं। सवाल है कि कांग्रेस के कुर्मी प्रत्याशी के मुकाबले भाजपा भी कुर्मी प्रत्याशी देकर अपने वोट बढ़ायेगी या कुर्मी वोट विभाजित कराएगी, जनता की नजर में यह बड़ा सवाल है। यही नहीं भाजपा से यदि गठबंधन टूटता है तो अपना दल भी यहां से कुर्मी उम्मीवार ही देगी। ऐसे में भाजपा को सोच समझ कर निर्णय लेना होगा।

गोविंद माधव हो सकते हैं बड़े मैसेंजर

जानकार बताते हैं कि नये राजनीतिक हालात में भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद माधव ही सबसे ठोस उम्मीदवार हो सकते हैं। एक तो वे पूर्व मंत्री स्व. धनराज यादव के पुत्र हैं दूसरे जिलाध्यक्ष के रूप में वह पूरे जिले के साथ अपने गृह विधानसभा क्षेत्र में काफी सक्रिय रहे हें। उनकी छवि भी अपने पिता जी की तरह बेदाग और निष्कलंक है। सबसे बड़ी बात कि आज सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के राजनीतिक उठान के दौर में भाजपा से यादव उम्मीदवार देकर गोविंद माधव के माध्यम से पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को मैसेज भी दिया जा सकता है।

 

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