आंगनबाड़ी केन्द्र बदहाल, बच्चे मौत के कगार पर, फरियाद सुनने वाला कोई नहीं
अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। योगी आदित्यनाथ की सरकार में प्रशासन कितना बेलगाम और संवेदनशील हो सकता है, इसकी ताजा मिसाल बकुरहवां गांव में स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र है। जहां पोषण और शला पूर्व शिक्षा के लिए जाने वाले बच्चों का जीवन खतरे में है, मगर जानकारी देने के बावजूद जिम्मेदार कोई कारर्वाई नहीं कर रहे हैं।
जोगिया विकास खंड के ग्राम बकुरहवा में लगभग 25 साल पहले आंगनबाडी केन्द्र का निर्माण हुआ था। वतमान में उस भवन की हालत खराब है। भवन की छत और दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। वह भवन कभी भी गिर सकता है। लिहाजा अब ग्रामीणों ने अपने बच्चों को वहां बैठने से मना कर दिया है। गांव के लगभग 40 बच्चे अच्छे पोषण के लिए पुष्टाहार लेने तथा शालापूर्व शिक्षा आदि के लिए वहां जाते हैं। लेकिन जान जाने के खतरे को देखते हुए बच्चों ने केन्द्र में जाना बंद कर रखा है।
ग्रामवासी बताते हैं कि इस बारे में सीडीओ, बीडीओ, सीडीपीओ और सेक्रेटरी को मिलकर कई बार उनका ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन उन्होंने अभी तक उक्त मामले को संज्ञान में नहीं लिया। यह बेहद संवेदनहीनता का विषय है। इस बारे में क्षेत्र के मीडियाकर्मी प्रमोद कुमार गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने इस मामले को लेकर खुद अधिकारी को ज्ञापन दिया है, लेकिन उनकी बात भी अनसुनी कर दी गई।
सवाल है कि ऐसा क्यों हो रहा है? 40 बच्चों की जिंदगियों को खतरे में देख कर भी प्रशासन की संवेदनशीलता क्यों सोई पड़ी है? ग्रामीणो ने जिलाधिकारी से इस विषय में ध्यान देने और कार्रवाई की मांग की है।