जिलों में भेजे जाने लगे मतपत्र, मई जून में हो सकते हैं पंचायत चुनाव?

January 25, 2026 2:09 PM1 commentViews: 327
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— प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर आयोग का गठन बना एक बड़ा मुद्दा

— पूरे प्रदेश में लगभग 40 लाख मतदाताओं की तादाद बढ़ने का अनुमा

अजीत सिंह

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियाँ ज़ोर शोर से शुरू हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने लगभग 60 लाख मतपत्रों की छपाई पूरी कर ली है। जो अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में पहुंचाए जा रहे हैं। इसे चुनाव की उल्टी गिनती शुरू माना जा रहा है। चुनाव आगामी मई से जुलाई के बीच होने की संभावना है, जिसमें ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर मतदान होगा। मतपत्रों को पुलिस-पीएसी की सुरक्षा में स्ट्रांग रूम में रखा जा रहा है।

मतपत्रों को जनपदों में भेजना प्रारम्भ

राज्य निर्वाचन आयोग ने विशेष प्रकार के कागज पर मतपत्र छपाई पूरी कर ली है। प्रदेश के 75 जिलों में कुल लगभग 60 करोड़ मतपत्र भेजे जा रहे हैं, क्योंकि यूपी में पंचायत चुनाव में अलग-अलग स्तरों पर ग्राम प्रधान, सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अलग-अलग मतपत्र होते हैं।

खबर है कि जनपद अमेठी में मतपत्र पहुंच भी चुके हैं, जहां 16 लाख से अधिक मतदाता मतदान करेंगे। इन्हें स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा गया है। इसी प्रकार शामली ज़िले में भी 33.44 लाख मतपत्र पहुंचे हैं। अन्य जिलों में भी ट्रक और सुरक्षा बलों के साथ वितरण जारी है। यह कार्रवाई इसलिए पहले शुरू की गई है क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में मतपत्रों का वितरण समय लेता है। सिद्धार्थनगर में अंतिम सूची के प्रकाशन तक वोटरों की संख्या 12 से 13 लाख के बीच होने का अनुमान है।

ओबीसी आरक्षण अहम मुद्दा

गौर डालब है कि पिछला चुनाव अप्रेल 2021 में चार चरणों में हुआ था। इस बार इसके मई से जुलाई के बीच होने की उम्मीद है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण जारी है। दावे और आपत्तियां निस्तारण के बाद 28 मार्च को अंतिम सूची जारी होगी । इस बार प्रदेश में लगभग 40 लाख नए मतदाता जुड़ने की संभावना है।ओबीसी आरक्षण को लेकर आयोग गठन एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है,जो चुनाव तिथि पर असर डाल सकता है। इस बार प्रत्याशियों की खर्च सीमा दो गुना करने के साथ अन्य कई नियमों में बदलाव किए गए हैं।

बढ़ने लगीं हैं राजनीतिक हलचलें

यूपी पंचायत चुनाव ग्रामीण स्तर पर राजनीतिक ताकत का बड़ा परीक्षण होते हैं। पिछले चुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार सपा, बसपा और कांग्रेस भी जोर लगा रही हैं। मतपत्रों की रवानगी से जनता में चुनावी हलचलें बढ़ने लगी हैं। संभावित उम्मीदवार अभी से सियासी गुणा भाग के प्रयास में जुटने लगे हैं।

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