बड़ुइयां कांडः दो बच्चों के साथ नदी में कूदते समय उस मां का कलेजा क्यों नहीं कांपा?
नजीर मलिक
सिद्धार्थनगर। शुक्रवार की रात 10 बजे के आस पास एक मां ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ नदी में कूछ कर जान दे दी। घटना के पीछे पारिवारिक कलह बताई जाती है। लेकिन गौर करने की बात है कि माया नाम की उक्त महिला (मां) जान देते समय किस पी़ड़ा को ढो रही होगी कि अपने बच्चों के साथ नदी में कूदते समय उसका कलेजा एक पल को नहीं कांपा। जाहिर है कि गृह कलह में मिलने वाली दुख बच्चों की मौत से कम तो नहीं ही रहा होगा। घटना कठेला थाना क्षेत्र के बड़ुइया गांव की है। गांव में आज भी शोक का माहौल है।
अट्ठाईस साल की माया के दो बच्चे थे। 6 साल की बेटी मोनिका और 2 साल का दुधमुंहा बेटा मनीष। माया अपने सो रहे बच्चों को लेकर रात में घर से निकलती है और पास से गुजर रही नदी में कुद कर जान दे देती है। कितना दर्दनाक रहा होगा वह मंजर जब डूब रहे बच्चों की सांस घट रही होगी और वह आक्सीजन के लिए तड़प रहे होंगे। लेकिन जरा उस मां के बारे में भी सोचिए कि वह पारिवारिक कलह के नाम पर किस पीड़ा से गुजर रही होगी, कि उसे अपने बच्चों को नदी में डूबोते वक्त काई दर्द न हुआ? इसका मतलब शायद घरेलू कलह की पीड़ा उसके बच्चों की मौत की पीड़ा से कम न रही हो।
शनिवार की सुबह सूचना पर कठेला पुलिस अपने सीओ सुजीत राय के नेतृत्व में नदी पर पहुंच कर लाश को कब्जे में लेकर पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया है। माया के मायके वालों ने बताया कि माया का पति सचिन दिल्ली रहता है। इससे साफ है कि दहेज का कोई मामला नहीं है। इसके अलावा घरेलू कलह में यदि माया का उत्पीड़न होता होगा तो उसके सुसुराल वाले पति की गैर हाजिरी में करते होंगे।
शोहरतगढ़ सीओ सुजीत राय के मुताबिक पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मगर ऐसी हालत में पुलिस को यह जांच करना चाहिए कि गृह कलह का कारण क्या है। जिसके चलते एक मां को अपने दो मासूम बच्चों के साथ जान देने पर मजबूर होना पड़ा। यदि माया के साथ कोई जुल्म साबित होता है तो फिर दोषी के लिए कड़े दंड की व्यवस्था करनी होगी। पुलिस इसे आत्महत्या की सामान्य घटना मान कर यदि क्लोजर रिपोर्ट लगाती है तो यह माया के साथ ही नहीं पूरे महिला समाज के साथ नाइंसाफी होगी।





