आरएसएस की शाखा से बौद्धिक विकास व चरित्र निर्माण होता है- रमेश

March 29, 2026 7:06 PM0 commentsViews: 148
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संघ में है सादगी व कर्मठता

अजीत सिंह 

सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा बीएसए ग्राउंड पर रविवार को शाखा संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जगह-जगह लगने वाली सभी बस्तियों की शाखाओं को एक साथ लगाने का अभिनव प्रयोग हुआ। इसमें 37 शाखाओं के मुख्य शिक्षक एवं शाखा कार्यवाह अपने ध्वज एवं सैकड़ों स्वयंसेवकों को लेकर कार्यक्रम स्थल पर जुटे।

स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए प्रांत प्रचारक रमेश ने कहा कि आरएसएस की शाखा व्यक्ति के बौद्धिक विकास व चरित्र निर्माण की अभिनव प्रयोगशाला है, यहां स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना साकार होती है। संघ में सादगी है, कर्मठता है, इसमें स्वयंसेवक देश के लिए त्याग और अनुशासन सीखते हैं। बाल, तरुण, प्रौढ़ सभी वर्ग के लोग इसमें शामिल होकर आपस में सामंजस्य स्थापित करते हैं। कहा कि शाखा में स्वयंसेवक सामाजिक समरसता, देश की सभ्यता व संस्कृति से परिचित भी होते हैं। इसमें नियमित भाग लेने से व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से सबल बनता है।

उन्होंने शाखा पर प्रतिदिन फहराए जाने वाले भगवा ध्वज को सनातन धर्म व संस्कृति का प्रतीक बताते हुए कहा कि शाखा में ध्वज फहराने के पश्चात सूर्य नमस्कार, योग, व्यायाम, खेल, देशभक्ति के गीत होते हैं, इससे लोगों में राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत होता है। विश्वकल्याण के लिए भारत को विश्वगुरु बनाने में आरएसएस के स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवंतु सुखिनः वी की प्राचीन सनातन संस्कृति का मूल मंत्र है। इसी मंत्र को आत्मसात कर भेदभाव मुक्त समरस समाज की स्थापना संघ का लक्ष्य है। संघ प्रार्थना के उपरांत कार्यक्रम संपन्न हुआ। शाखा संगम में विभाग प्रचारक राजीव नयन, अजीत, जिला प्रचारक विशाल, जिला कार्यवाह शिवेंद्र, अविनाश, मनोज कुमार, बिपुल, अभय, अरुणेश, प्रत्यूष, अभिषेक, धनंजय, सौरभ, नंदलाल आदि मौजूद रहे।

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