भागवत कथा में श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तार से किया गया वर्णन
अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। शहर के श्री सिहेंश्वरी देवी मंदिर के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार की रात श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथावाचक पंडित आलोकानंद दास ने भगवान श्रीकृष्ण के कंस वध और रूक्मिणी हरण एवं विवाह का प्रसंग विस्तार से सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा के दौरान कथावाचक पंडित आलोकानंद दास ने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा पहुंचकर अत्याचारी कंस का वध किया और धर्म की स्थापना की।
कंस के अत्याचारों से पीड़ित जनता को जब मुक्ति मिली तो पूरे नगर में हर्ष और उल्लास का वातावरण छा गया। इस प्रसंग का वर्णन करते समय पंडाल जय श्रीकृष्ण के उद्घोष से गूंज उठा। इसके उपरांत रूक्मिणी हरण और विवाह का प्रसंग सुनाते हुए पंडित आलोकानंद दास ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति रूक्मिणी के अटूट प्रेम और विश्वास का भावपूर्ण चित्रण किया।
उन्होंने बताया कि रूक्मिणी ने अपने मन, वचन और कर्म से श्रीकृष्ण को ही पति रूप में स्वीकार किया था और अंततः भगवान ने उनका सम्मान रखते हुए उनका हरण कर विधि पूर्वक विवाह किया। कथा के बीच-बीच में भजन-कीर्तन ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु देर रात तक कथा में लीन रहे और पूरे क्षेत्र में भक्ति की सरिता प्रवाहित होती रही।





