महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती धूम धाम से मनाई गई
अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। मेवाड़ के महान शासक, अदम्य साहस और वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती सिद्धार्थनगर मुख्यालय के अम्बेडकर सभागार में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कुंभलगढ़ में जन्मे इस वीर योद्धा को उनकी 486वीं जयंती पर उपस्थित लोगों द्वारा नमन किया गया। आयोजन स्थल पर सर्व समाज के लोगों की भारी भीड़ जुटी और लोगों ने अपने अपने तरीके से महाराणा के देश हित की कहानियाँ और शौर्य की गाथा सुनाई और कही। कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा ने जंगल में घास फूस खाकर कई दिनों तक रह गए मगर मुगल बादशाह अकबर की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की।
वक्ताओं ने कहा कि आज का दिन महाराणा के त्याग, राष्ट्रभक्ति, और स्वतंत्रता के प्रति समर्पण को याद करने का अवसर है उन्हें अपनी वीरता और 81 किलो का भाला लेकर लड़ने वाले निडर योद्धा के रूप में याद किया जाता है। महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के राजा थे और उन्हें इतिहास में उनके दृढ़ प्रण के लिए जाना जाता है। हमे चार धाम करने के साथ ही पाँचवा धाम हल्दीघाटी को मानना चाहिए और वहां जाना चाहिए, वहां के ऐतहासिक चीजों को देखना और समझना चाहिए।
खचा खच भरे अम्बेडकर सभागार में मुख्यरूप से राम कृष्ण पाण्डेय और आशीष सिंह, शिवनाथ चौधरी, क्षत्रिय सभा एडोकट अखंड प्रताप सिंह व प्रो. अरविंद सिंह ने ओजस्वी भाषण दिया। इनके आलावा राजकुमार सिंह उर्फ़ राजू शाही, कुँवर आनंद सिंह, सौरभ पाल सिंह, दिवाकर विक्रम सिंह, पूर्व विधायक अनिल सिंह, माधव सिंह, उपेंद्र सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख राजू सिंह, फते बहादुर सिंह, कृष्णपाल सिंह, विक्रांत सिंह विक्कू, अमर नाथ सिंह, कैलाश नाथ दुबे, प्रदीप वर्मा, दिलीप सिंह, मुरारी सिंह सहित दो सौ से ज्यादा लोग मौजूद रहे व कुछ लोगों ने शानदार सम्बोधन भी किया।
क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष भूपनारायण सिंह उर्फ़ राजन सिंह की अध्यक्षता और महामंत्री हरेंद्र बहादुर सिंह के संचालन में हुए कार्यक्रम में विकास सिंह हाड़ा, राजवंत सिंह, केपी सिंह, ओपी सिंह, कौशलेन्द्र त्रिपाठी, नन्हें सिंह, करण सिंह, कृपा शंकर त्रिपाठी, कुँवर विक्रम सिंह, हरिशंकर सिंह, संजय सिंह, अस्टभुजा सिंह श्रीनेत, शिवम सिंह, विपलव दुबे, हृदेश सिंह, आशनरायण सिंह, विनय शर्मा, राणा सिंह, उमेश सिंह, डिम्पल सिंह, शरद सिंह, बीरेंद्र सिंह सहित दर्जनों वक्ताओं ने कहा कि हमें आज महाराणा प्रताप के पद चिन्हों पर चलने कि जरूरत है। दो सौ से अधिक लोगों ने जुटकर महाराणा प्रताप की फोटो पर माल्यार्पण कर जयंती मनाई और जय महाराणा जय श्रीराम जय भारत के नारे लगाए।





