सिद्धार्थनगर में 07 अनुसूचित जनजाति का बना फर्जी प्रमाण पत्र हुआ निरस्त

August 7, 2026 10:13 PM0 commentsViews: 112
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अजीत सिंह 

नेट फोटो

सिद्धार्थनगर। जनपद स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उसका विकास क्षेत्र के सुगही ग्राम पंचायत के एक परिवार के सभी सदस्यों का अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई विकास खण्ड उसका बाजार के बरदहा ग्राम पंचायत के तोला घुमैठा निवासी शिवम सिंह की शिकायत पर हुई है।

पूर्व में भी इस प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया था  लेकिन प्रभावित लोगों ने उच्च न्यायालय से इस मामले पर स्टे लाकर जिलाधिकारी के निर्णय को चुनौती दी थी। शिवम सिंह ने बताया उन्होंने न्यायालय के निर्णय के क्रम में पुनः शिकायत की जिस पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने अपर जिलाधिकारी, एसडीएम, जिला समाज कल्याण अधिकारी, तहसीलदार और सतर्कता प्रकोष्ठ की समिति गठित कर जांच सौंप दी।

जाँच में मिला…

समिति को जांच में मिला कि उसका बाजार विकास क्षेत्र के सुगही ग्राम पंचायत निवासी नंदलाल पिछड़ा वर्ग के कहार जाति से आते हैं। पुराने अभिलेखों में इनके बाबा और पिता की जाति कहार लिखी मिली है। इनके सगे चाचा और भतीजे वर्तमान समय में भी पिछड़े वर्ग के कहार जाति में ही हैं, लेकिन नंदलाल ने तथ्य गोपन कर अपने पूरे परिवार के लिए अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र बनवा लिया था।

राजस्व अभिलेखों और ग्रामीणों के बयान से हुई पुष्टि…

जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति द्वारा की गई जांच के दौरान कई पुख्ता सबूत सामने आए। जांच टीम ने पुराने दस्तावेजों और साक्ष्यों को खंगाला जिसमें 1333 व 1359 फसली वर्ष के राजस्व अभिलेखों रजिस्ट्री दस्तावेज के अलावा 2020 में बीडीओ और तहसीलदार के स्कूल के ट्रांसफर सर्टिफिकेट और ग्रामीणों के दर्ज बयानों को भी आधार बनाया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पुख्ता सबूतों और दस्तावेजों की जांच में यह साफ साबित हो गया कि नंदलाल और उनका पूरा परिवार वास्तव में कहार जाति से संबंधित है। जबकि नंदलाल अपने अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र के पक्ष में पुराना नया व महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत नही कर सके।

इनके प्रमाण पत्र हुए निरस्त…
जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने जांच में नंदलाल, सावित्री, मनोज कुमार, स्व. जितेंद्र कुमार, सुनैना, प्रिंस और मुस्कान के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बना पाया जिसे निरस्त कर दिया है।

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