पैगम्बर साहब ने मुजहब केे साथ मुल्क के साथ वफादारी की हिदायत भी दी- मौलाना अब्दुलाह
निजाम अंसारी
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शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर। स्थानीय कस्बे के मस्जिद चौराहे पर आयोजित जश्न-ए- ईद मीलादुन्नबी को सम्बोधित करते हुए मौलाना अब्दुल्लाह आरिफ साहब ने कहा कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद (सअव) ऐसे वक्त में दुनिया मे तशरीफ लाए, जब दुनियां मे जुल्म और हैवानियत चरम पर थी।लोग मासूम बेटियों को जिन्दा दफन कर दिया करते थे। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जाना आम बात थी। यही नहीं उन्होंने मुल्क से मुहब्बत की भी सीख दी।
ऐसे माहौल में पैगम्बर साहब ने लोगों को सत्य की राह पर चलने में महत्चपूर्ण रोल अदा किया। महिलाओं को सम्मान दिलाया और मासूम बच्चियों का कत्ल बन्द करवाया। उन्होंने बताया कि जब वतन पर आंच आये तो सामने कोई भी हो जंग से पीछे नहीं हटना चाहिए। यह मुलक से मुहब्बत की एक झलक है। इस तरह पैगम्बर हजरत मोहम्मद स०अ०व० की पूरी जिंदगी एक बेहतर जिंदगी गुजारने के नमूना है।
इसी क्रम में मौलाना राजिउल्लाह साहब ने पैगम्बर हजरत मोहम्मद स०अ०व० साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम कभी भी देश में नफरत फैलाना नही सिखाता बल्कि अखलाक और मोहब्बत से जिंदगी गुजारने की सीख देता है।कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर के मशहूर शायर मौलाना अब्दुल करीम साहब ने अपने कलाम से लोगों में उत्साह भर दिया जिससे लोग नारे लगाने और दाद देने पर मजबूर हो गए।
कार्यक्रम की शुरुआत तालिब इल्म ने कुरआन शरीफ की तिलावत कर शुरू किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना अब्दुल्ला आरिफ सिद्दीकी व संचालन मौलाना राजिउल्लाह साहब ने किया।इस दौरान दारुलउलूम अहले सुन्नत नुरूल्लतीफ के कारी अकबर अली, मदरसा नाजिम आला नवाब खान, बाबूजी अंसारी, वकील खान, अफसर अंसारी, सभासद नियाज शाह, इजहार हुसैन, छात्र नेता शहज़ाद सिद्दीकी, गयासुद्दीन, अज्जू अंसारी, अब्दुर्रहीम, अरबाज शाह, नदीम इदरीसी, जमील अहमद, अब्दुल अजीज राईनी आदि मौजूद रहे।