गैस सिलेंडर वितरण में गांवों से भेदभाव पर भाकियू ने उठाये सवाल
— शहरों में 25 दिन व देहातों में 45 दिन पर सिलेंडर देने की बनाई जा रही नीति
— यह नीति भेदभाव पूर्ण, क्या शहरियों से कम भोजन खाता है ग्रामीण समाज ?
अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर।भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला संरक्षक अरविंद कुमार शुक्ला ने गैस सिलेंडर उपयोग अवधि के मानकों को लेकर सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार से पूछा है कि क्या एक रसोई गैस सिलेंडर वास्तव में 45 दिनों तक चल सकता है? अरविंद शुक्ला ने सरकार की दोहरी नीति पर प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान मानकों में शहर के लिए 25 दिन और गांव के लिए 45 दिन की अवधि तय की जा रही है, क्या एक ही सिलेंडर शहर में 25 दिन और गांव में 45 दिन चलेगा? उन्होंने कहा कि यह नीति भेदभाव पूर्ण है। सरकार को इससे बचना चाहिए।
भकियू नेता अरविंद शुक्ल ने सवाल उठाया कि शहर और गांव के उपभोक्ताओं के बीच इस तरह का भेदभाव क्यों किया जा रहा है? क्या ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की जरूरतों को कमतर आंका जा रहा है? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर गांवों के साथ इस तरह का सौतेला व्यवहार हो रहा है, तो क्या यही सरकार के ‘विकसित भारत’ का असली स्वरूप है? क्या गांव का गरीब किसान शहरियों से कम भोजन करता है? किसान यूनियन ने मांग की है कि सरकार इस विसंगति को दूर करे और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को समझते हुए न्यायसंगत नीतियां बनाए।
उन्होंने कहा कि गांव का किसान और मजदूर भी उसी हक का अधिकारी है जितना शहर का निवासी। देश की अर्थव्यवस्था में गांव के किसानों का योगदान कम नही इसके अलावा वह देश का अन्नदाता भी है इसलिए हम भकियू के लोग इस भेदभाव पूर्ण नीति को कतई स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने सरकार से इस नीति को लागू न करने की अपील की है।






