एसाईआर: पति-पत्नी की जोड़ी ने अपने आवास को मेला ग्राउंड बना दिया

November 22, 2025 9:35 AM0 commentsViews: 272
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क्या सिद्धार्थनगर में सपा समेत समस्त विपक्ष अपनी चुनावी हार की पटकथा खुद लिख रहा है?

 

अजीत सिंह

सिद्धार्थनगर। ज़िले में एसाईआर के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया जोरों पर है। इस कार्यक्रम के लिए समाजवादी पार्टी ने जिला स्तर पर रोडमैप तैयार कर रखा है, मगर ज़िले में इक्का दुक्का सपाई ही कार्यक्रम के प्रति गंभीर नज़र आ रहे है, जिससे एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

एसाईआर को लेकर बांसी के पूर्व नगर पालिका चेयरमैन मोहम्मद इदरीस पटवारी का कैम्प कार्यालय किसी मेला ग्राउंड की तरह नज़र आ रहा है। इदरीस पटवारी के साथ उनकी पत्नी और नपा की वर्तमाम चैयरमैन चमन आरा राईनी पुरुष और महिला मतदाताओं को वोटर प्रपत्र भरवा रहे हैं। एसाईआर फॉर्म भरने वालो कि भीड़ रोजाना लग रही है। इनमें गरीब और अशिक्षित तबके के लोग ज्यादा हैं। इसके लिए उन्होंने अपने कार्यालय पर फॉर्म भरने वाले एक दर्जन शिक्षित युवकों को लगा रखा है, जो सबके डॉक्यूमेंट चेक कर मतदाताओं का फॉर्म भरवा रहे हैं।

इस बारे में पूर्व चैयरमैन इदरीश पटवारी बताते है कि ये प्रक्रिया कठिन है, क्षेत्र के बीएलओ भी समयाभाव में सभी घरों पर नहीं पहुंच पा रहे। ऐसे में अशिक्षित मतदाताओं की मदद तो करनी ही पड़ेगी। यही नही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय अखिलेश यादव का इस बारे में साफ निर्देश भी है। इदरीश पटवारी समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष भी हैं। वे और उनकी पत्नी चमनआरा दोनों राजनीतिक परिवार से हैं। वे अपनी राजनीतिक ज़िम्मेदारियों की महत्ता बखूबी समझते हैं, मगर जहां तक पूरे ज़िले की बात है, सपा के ज़िम्मेदार ब्लॉक प्रभारीगण एसाईआर के प्रति बिल्कुल उदासीन हैं।

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की टीम विधायक सैयदा खातून, रामफेर उर्फ अंशु यादव, रिंधु पासवान जैसे कतिपय नेता ही इस दिशा में काम कर रहे है, परंतु जिस तरह से इदरीस-चमन आरा (पति-पत्नी) की जोड़ी अपने घर पर स्थायी रूप से प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की एसाईआर में मदद कर रहे हैं वह उल्लेखनीय है। अपने इस योगदान पर इदरीश पटवारी कहते भी हैं कि यदि उन जैसे लोग एसाईआर में गरीब और अशिक्षित मतदाता की मदद नहीं करेंगे तो और कौन करेगा।

एसाईआर एक महत्वपूर्ण और जटिल चुनावी प्रक्रिया है। विपक्ष आरोप लगाता है कि यह भारतीय नागरिकता की अप्रत्यक्ष जांच के साथ विपक्ष समर्थित वोटों को काटने की एक साजिश भी है। परंतु यदि उनका आरोप सही है तो विपक्षी दलों के नेता इस काम मे गांवों की अशिक्षित जनता की मदद क्यों नहीं कर रहे? क्या वह इस प्रक्रिया से अलग रहकर अपनी हार की पटकथा खुद ही लिख रहे हैं? यह एक अहम सवाल है।

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