मानसी द्विवेदी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल कर जिले का बढ़ाया सम्मान

February 2, 2026 11:38 PM0 commentsViews: 326
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अजीत सिंह 

सिद्धार्थनगर। विकास क्षेत्र उसका बाज़ार के ग्राम पंचायत तिघरा निवासिनी मानसी द्विवेदी को दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने वनस्पति विज्ञान में पीएचडी (Doctor of Philosophy) की उपाधि प्रदान की है। उन्होंने अपना शोध कार्य “ Study of Fungal Pathogens causing Strawberry fruit rots and their Management by Natural agents.” विषय पर पूरा किया। यह शोध वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रो. पूजा सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मानसी ने यह उपलब्धि हासिल कर अपने पिता कैलाश नाथ द्विवेदी व पूरे जनपद का मान बढ़ाया है।

बतादें कि पीएचडी सर्वोच्च शैक्षणिक उपाधि है, जो गहन मौलिक शोध (original research) और थीसिस के सफल बचाव (defence) के बाद विश्वविद्यालय द्वारा दी जाती है। यह डिग्री ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता दर्शाती है। इन्होंने अपने शोध में स्ट्रॉबेरी पर कवक संक्रमण तथा इसके प्राकृतिक प्रबंधन का विश्लेषण किया है, इससे सम्बंधित 5 शोध-पत्र अंतराष्ट्रीय स्तर के स्कोपस इंडेक्स (Q1,Q2,Q3 और Q4) जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। शोध के दौरान इनका पेटेंट प्रकाशित हो चुका था जो अब औद्योगिकरण की ओर अग्रसर है।

डॉक्टर मानसी द्विवेदी ने बताया कि, माननीय कुलपति महोदया प्रो. पूनम टंडन के कुशल नेतृत्व और प्रेरणादायी विजन के कारण विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार का एक उत्कृष्ट वातावरण निर्मित हुआ है, जिसने मुझे लक्ष्य तक पहुँचने के लिए प्रोत्साहित किया। निदेशक, अनुसंधान प्रकोष्ठ प्रो. दिनेश यादव, नोडल ऑफिसर डॉ. मनिन्द्र कुमार तथा विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग प्रो.अनिल कुमार द्विवेदी आपके निरंतर सहयोग, दिशा-निर्देशों और प्रशासनिक सुगमता के लिए आभार व्यक्त किया। आपके मार्गदर्शन ने मेरे शोध दृष्टिकोण को एक नई दिशा दी है।

डॉ. मानसी द्विवेदी ने अपने शोध के दौरान डॉ. रितेश कुमार राय और प्रो. पूजा सिंह के साथ मिलकर ‘ऑर्गेनिक बेरी सेफ गार्ड’ नामक एक प्राकृतिक यौगिक (Natural Compound) विकसित किया है। यह नवाचार विशेष रूप से स्ट्रॉबेरी जैसे शीघ्र खराब होने वाले (Highly Perishable) फलों के लिए वरदान साबित होगा। डॉ. मानसी के शोध विश्लेषण में पाया गया कि यह उत्पाद फलों की शेल्फ लाइफ को अद्भुत तरीके से बढ़ा देता है, जो स्ट्रॉबेरी सामान्यत 2-4 दिन में खराब हो जाती है, वह इसके प्रयोग से सामान्य तापमान पर 10-12 दिन और कोल्ड स्टोरेज में 20-25 दिनों तक सुरक्षित रह सकती है।

इसके उपयोग से फलों के स्वाद, पोषण और गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। यह पूरी तरह प्राकृतिक, इको-फ्रेंडली व सुरक्षित यौगिक है, जिससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है। कम लागत में तैयार होने के कारण यह किसानों और व्यापारियों के लिए आर्थिक रूप से बेहद किफायती है। डॉ. मानसी द्विवेदी सिद्धार्थनगर के वरिष्ठ मान्यता प्राप्त पत्रकार कैलाश नाथ द्विवेदी एवं श्रीमती अर्चना द्विवेदी की सुपुत्री हैं। डॉ मानसी की इस उपलब्धि पर परिवार, शिक्षकगण और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

स्ट्रॉबेरी की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने वाला ऑर्गेनिक बेरी सेफ गार्ड विकसित: डॉ. मानसी द्विवेदी ने एक ऐसा प्राकृतिक यौगिक तैयार किया है, जिससे सामान्यतः 2-4 दिन में खराब होने वाली स्ट्रॉबेरी अब सामान्य तापमान पर 12 दिन और कोल्ड स्टोरेज में 25 दिनों तक सुरक्षित रह सकेगी।

नवाचार का औद्योगिकरण और पेटेंट: शोध के दौरान विकसित यह इको-फ्रेंडली उत्पाद न केवल पेटेंट, बल्कि औद्योगिक उत्पादन की ओर अग्रसर है। यह तकनीक किसानों और व्यापारियों के लिए कम लागत में फलों को सड़ने से बचाने का किफायती समाधान देगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान: डॉ. मानसी के इस शोध कार्य पर आधारित 5 शोध-पत्र प्रतिष्ठित स्कोपस इंडेक्स (Q1-Q4) जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं, जो उनके शोध की उच्च गुणवत्ता और वैश्विक मानकों को प्रमाणित करते हैं।

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