लूट और चोरी की हालिया वारदातों में पुलिस के हाथ खाली
नज़ीर मलिक
“पूर्वी उत्तर प्रदेश में नेपाल सीमा से सटा सिद्धार्थनगर ज़िला अपराध की वजह से कभी भी सुर्खिंयों में नहीं रहा। इसकी दो मोटी वजह हो सकती है। पहली यह कि हाईप्रोफाइल क्रिमिनल्स ने इस ज़िले को कभी अपने लायक नहीं समझा। और दूसरी वजह यह कि सिद्धार्थनगर ज़िले की पुलिस हमेशा से बेहद चुस्त और चौकन्नी रही है। इस विषय पर जब कपिलवस्तु पोस्ट ने शहर में रायशुमारी करवाई गई तो पुलिस की चुस्ती और चौकसी वाले फैक्टर को पब्लिक ने नकार दिया। तर्क यह था कि सिद्धार्थनगर पुलिस लूट और चोरी की मामूली वारदात से पर्दा नहीं उठा पा रही है। लिहाज़ा, सिद्धार्थनगर पुलिस को स्मार्ट पुलिसिंग की कैटगरी में नहीं रखा जा सकता।”
तक़रीबन 15 दिन पहले डुमरियागंज थाना क्षेत्र में कादिराबाद गांव के पास एक डॉक्टर के साथ लूटपाट हुई थी। कनपटी पर रिवॉल्वर रखकर लुटेरों ने डॉक्टर से 10 हज़ार रुपए और उनका मोबाइल छीन लिया था। इस केस के बारे में डुमरियागंज थानाध्यक्ष आरपी सिंह का कहना है कि संदेह के आधार पर कुछ संदिग्धों ने पूछताछ की गई है, मगर अभी तक कोई लीड नहीं मिल पाई है।
इसी तरह पथरा थाना क्षेत्र में स्वर्ण कारोबारी से 75 हजार के गहने लूटे गए। लुटेरों ने हथियार के बल पर दिनदहाड़े इस वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में भी पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। पथरा थानाध्यक्ष अज़ीज़ुर्रहमान का कहना है कि अभी तक लुटेरों का कोई सुराग उनके हाथ नहीं लगा है।
तीसरी सनसनीखेज़ वारदात पिछले महीने सदर पुलिस स्टेशन से महज़ आधा किलोमीटर की दूरी पर दर्ज की गई। यहां स्वर्ण कारोबारी संतोष वर्मा को गोली मारकर 2 लाख की लूट की गई मगर सदर पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। सदर थाने की कमान शिवाकांत मिश्रा के पास है।
लूट से इतर छोटी-मोटी चोरी की वारदात हर दिन की कहानी है। कमोबेश पूरे ज़िले में बाइक या छोटी-मोटी चीज़ें उड़ाई जा रही हैं। मगर इन मामलों को भी सिद्धार्थनगर पुलिस अभी तक क्रैक नहीं कर सकी है।
1:58 PM
रिस्वत खोर पुलिस कभी काम नही करती है