श्रीराम कथा: चौथे दिन बाल स्वरूप में श्रीराम की लीलाओं ने बांधा समां, श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध
अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के अवेद्यनाथ सभागार में चल रहे अमृतमयी श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन सोमवार को प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का मनोहारी प्रसंग सुनाया गया। कथा के दौरान पूरा सभागार भक्ति और श्रद्धा के रस में डूबा नजर आया। अयोध्या धाम से पधारे अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक संत गौरव कृष्ण शास्त्री ने अपनी मधुर वाणी में भगवान श्रीराम के बाल्यकाल की लीलाओं का ऐसा सजीव वर्णन किया कि श्रोता भावविभोर हो उठे।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम का बाल रूप अत्यंत आकर्षक और करुणा से परिपूर्ण था, जिसकी एक झलक मात्र से ही भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने ने कहा कि श्रीराम का बाल स्वरूप हमें सरलता, निष्कपटता और मर्यादा का संदेश देता है। उनके जीवन का हर प्रसंग मानव जीवन को सही दिशा देने वाला है। उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीराम बचपन से ही आदर्शों और संस्कारों का पालन करते थे। कथा के दौरान संगीतमयी भजनों ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जय श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। सभागार में उपस्थित श्रोता पूरे समय कथा श्रवण में तल्लीन नजर आए और कई श्रद्धालु भावुक भी हो उठे।
श्रीराम कथा महोत्सव को सफल बनाने में संरक्षक संतोष श्रीवास्तव, अध्यक्ष शिवदत्त अग्रहरि, महामंत्री नीरज श्रीवास्तव, आयोजक शुभम श्रीवास्तव, सह संयोजक व सभासद संदीप जायसवाल, राघवेंद्र यादव, रमेश गुप्त, अजय कसौंधन, अनिल सिंह, रजनीश उपाध्याय, पप्पू चौबे, सुनील त्रिपाठी, राकेश त्रिपाठी, नवीन श्रीवास्तव, अनिल वर्मा, सुनील श्रीवास्तव, डॉ. अभय शुक्ला, श्रीश श्रीवास्तव, पंकज पासवान, देव अग्रहरि, डॉ. सीमा मिश्रा, आशा उपाध्याय, श्रीमती सोनू कसौंधन, साधना श्रीवास्तव, सुधा त्रिपाठी, सीमा श्रीवास्तव आदि की भूमिका अहम रही। कथा के अंत में आरती के साथ वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम से सुख-समृद्धि की कामना की।






