टीईटी अनिवार्यता पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के बयान से भड़का शिक्षकों का गुस्सा, जलाया शिक्षा मंत्री का पुतला

February 12, 2026 1:24 AM0 commentsViews: 197
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अजीत सिंह 

बीएसए कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते शिक्षक

सिद्धार्थनगर। संसद में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी के लिखित जवाब के बाद वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त बेसिक शिक्षकों में असमंजस और असुरक्षा की भावना गहरा गई है। इस मुद्दे ने अब आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। बुधवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में शिक्षक बीएसए कार्यालय पहुंचे और विरोध जताया। इस दौरान नारेबाजी की गई, पुतला दहन हुआ और लिखित जवाब की प्रतियां जलाकर नाराजगी व्यक्त की गई।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री का शिक्षकों द्वारा जलाया गया पुतला

शिक्षक संघ के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की निर्धारित शैक्षणिक अर्हताओं के आधार पर हुई थी, जब टीईटी लागू नहीं था। ऐसे में वर्षों बाद नई अनिवार्यता लागू करना उनके अधिकारों और सेवा सुरक्षा के विपरीत है। यह केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों की सेवा स्थिरता और सम्मान से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सरकार ने जल्द स्पष्टीकरण नहीं दिया तो असंतोष और बढ़ सकता है।

जिला मंत्री योगेंद्र पांडेय ने कहा कि सरकार को शिक्षकों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्पष्ट आदेश जारी कर पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत नहीं दी गई, तो वृहद आंदोलन छेड़ा जाएगा। प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों ने एकजुट रहकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।

इस दौरान लालजी यादव, इन्द्रसेन सिंह, शिवाकांत दूबे, सुधाकर मिश्र, करूणेश मौर्य, शैलेंद्र मिश्र, रामशंकर पांडेय,आनंद राय सहित कई वरिष्ठ शिक्षक और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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