संदेह के घेरे में है उस्का बाजार का एक संदिग्ध ढाबा, जाने क्यों नहीं पड़ती पुलिस की नजर

May 16, 2018 2:57 pm0 commentsViews: 1944

— पुलिस ने एक-दो बार, ढाबा मालिक को विभिन्न आरोपों में दबोचा भी, लेकिन हर बार रहस्यमय ढंग से छोड़ दिया

 

अजीत सिंह

डेमो फोटो

सिद्धार्थनगर। नगर पंचायत उस्का बाजा अंतर्गत उस्का राजा से बृजमनगंज जाने वाली रोड पर एक तथाकथित ढाबा आवांछनीय गतिविधियों का केन्द्र बना हुआ है। कहने को तो यह ढाबा है लेकिन यहां ढाबे वाली एक वस्तु भी नही मिलती। इस ढाबे के बारे में जनता के बीच तरह तरह की चर्चाएं तो होती रहती हैं, मगर उस्का बाजार की पुलिस इसकी गंभीरता से नोटिस नही लेती। एक आध बार पुलिस ने उसे पकड़ा भी तो रहस्यमय ढंग से छोड़ दिया गया। इससे उसके हौसले और बुलंद हैं।

कहने को तो ढाबा है, लेकिन यहां भोजन, पानी नही मिलता। लोक निर्माण विभाग की जमीन  पर अवैध रूप से बनाये गये इस तथाकथित ढाबे में एक संदिग्ध व्यक्ति रहता है। यहां अक्सर वाहन चालक चोरी का डीजल बेचने और लोग ढाबा मालिक से मादक द्रव्य तथा गांजा, भांग आदि खरीदने आते हैं। यहा गांजा भांग सायद नेपाल से लाया जाता है और इसके चस्कायल लोगों को सप्लाई किया जाता है। यही अवैध ढाबे की कमाई का साधन है।

सूत्र बताते हैं कि यहां स्थानीय क्रिमनलों का आना जाना भी होता है, यहीं अपराधियों द्वारा कई अपराधों के बारे में रणनीति भी बनयी जाती है। अक्सर चोर और उठाईगीरे अपना सामान यही पर छूपाया भी जाता है। एक बार पास में पाई गई एक चोरी की मोटर साइकिल के बारे में उस्का बाजार पुलिस ने ढाबा चलाने वाले को उठाया भी था, लेकिन राजनीतिक दबाव में छोड़ दिया गया। इसी प्रकार उस्का बाजार थाने में तैनाते थानाध्यक्ष डी एन सिंह ने उसे चोरी के डीजल के साथ भी पकड़ा था।

क्षेत्रीय लोगों द्वारा बताया जाता कि ढाबे की झोपड़ी पर होने वाली गतिविधियों को देख कर वे अक्सर चिंतित रहते हैं, लेकिन ढाबे की दबंगई के वजह से काेई कुछ बोल नहीं पाता है। लोगों का कहना है कि उसकी गतिविधियों से लोग वाकिफ है लेकिन हैरत है कि पुलिस अभी तक अंजान है। लोगों ने पुलिस अधीक्षक से इसके चाल चरित्र की जांच करा कर कार्रवाई की मांग की है।

 

 

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