Special Report- कांग्रेस की सर्जिकल स्ट्राइक ध्वस्त कर सकती है बीजेपी के मजबूत किले

April 9, 2019 11:25 am0 commentsViews: 1009

— हैरान कर सकती है पूर्वी यूपी में कांग्रेस की नई रणनीति, संकट में फंस सकतीं हैं भाजपा की कई महत्वपूर्ण सीटें

नजीर मलिक

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश को लेकर कांग्रेस पार्टी नई रणनीति बना रही है। जिसके तहत कांग्रेस अपने प्रत्याशियों की जीत के बजाये भाजपा को हराने को लेकर ज्यादा गंभीर है। अगर यह रणनीति अमल में आई तो भाजपा के हाथों से तोते उड़ सकते हैं। उनके बड़े और धाकड़ नेताओं को परेशानी हो सकती है। तो आइये देखते हैं कि भाजपा के बड़े बड़े किलों को ध्वस्त करने वाली कांग्रेस की यह सियासी सर्जिकल स्ट्राइक क्या है।

क्या है कांग्रेस की नई रणनीति?

देश के बदलते राजीतिक हालात में कांग्रेस को यह पता चल चुका है कि इस बार भाजपा गठबंधन और कांग्रेस गठबंधन में कड़ी टक्कर होने जा रही है। इसके अलावा एक तीसरा फ्रंट है जो भाजपा व कांग्रेस का विरोधी है। किसी गठबंधन को पूर्ण बहुमत  न मिलने की दशा में वो अन्ततः गठबंधन कांगेस को समर्थन दे सकता है।

चूंकि यूपी में कांग्रेस कुछ चुनिंदा सीटों पर ही जीत सकती है। ऐसे में कांग्रेस के थिंक टैंक का मानना है कि जिन सीटों पर कांग्रेस नहीं जीत रही है, वहां ऐसे उम्मीदवार उतारे जाएं जो भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी कर उसे हरा सकें। इससे भाजपा कमजोर होगी और गठबंधन की जीत का रास्ता खुलेगा। इस सहानुभति के जरिए बाद में राहुल गांधी को गठबंधन को अपने पक्ष में करने की आसानी होगी।

प्रियंका गाधी की रणनीति को समर्थन

सू़त्र बताते हैं कि इसी रणनीति के तहत प्रियंका गांधी के इस विचार को कांग्रेस ने सहमति दे दी है। इसी के तहत राहुल गांधी ने कांग्रेस की अनेक सीटों के टिकटों में फेर बदल का फैसला लिया है। इसी के तहत अब नये उम्मीदवारों के चयन पर विचार होने लगा है। जिससे भाजपा के नुकसान का खतरा है। भाजपा नेता भी कांग्रेस की इस रणनीति पर बारीकी से नजर रखने के साथ इसके तोड पर विचार करने में लग गये हैं। देखिए आगे क्या होता है?

डुमरियागंज सहित कौन कौन सीट है निशाने पर?

कांग्रेस की ताजा रणनीति के तहत वह यूपी में कम से कम 30 से 40 लोकसभा सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतार सकती है जो न जीतने की स्थिति में भाजपा को हराने का काम कर सकें। सूत्र बताते हैं कि इनमें पूर्वी उत्तर प्रदेश की डुमरियागंज सहित पूर्वाचल की 14 सीटें हैं जहां नये सिरे से प्रत्याशी चयन हो रहा है। इनमे डुमरियागंज, महाराजगंज, बस्ती, बासंगांव, श्रावस्ती आदि की सींटें प्रमुख है। यह भाजपा के लिए खतरे का संकेत सकता है।

क्या है डुमरियागंज का हाल?’

यह सर्व विदित है कि डुमरियागंज संसदीय सीट से पूर्व सांसद और अच्छे जनाधार वाले नेता मुहम्मद मुकीम का टिकट पक्का था। लेकिन सूत्र बताते है कि गत 3 अप्रैल को प्रियंका गांधी ने मुहम्मद मुकीम से मिल कर उन्हें सम्मान के इन हालात के संकेत भी दिये हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी ने उनसे किसी ब्रह्मण नेता के नाम का सुझाव भी मांगा। नई हालत में कांग्रेस डुमरियागंज से टिकट के दावेदार सभी ब्रहमण दावेदारों के बारे में सर्वे भी करा चुकी ही है। वैसे अगर यह रणनीति अमले में न आ सकी तो अंत में मुहम्मद मुकीम ही कांग्रेस उम्मीवार होंगे।

कई सीटों पर यही रणनीति हुई लागू

इसी रणनीति पर अमल करते हुए कांग्रेस आला कमान अपने घोषित उम्मीदवार व पूर्व सांसद स्व. हर्ष्रवर्धन सिंह की बेटी सुप्रिया सिंह का टिकट काट कर वीरेन्द्र चौधरी को प्रत्याशी बनाने की सोच रही है, ताकि भाजपा सांसद पंकज चौधरी के कुर्मी वोटो में बंटवारा कर गठबंधन की जीत पुख्ता की जा सके। इसी प्रकार कांग्रेस ने श्रावस्ती में भाजपा को हराने के लिए धीरू सिंह व बांसगांव सीट से भाजपा के कमलेश पासवान को हराने के लिए उनके सजातीय पूर्व आईएएस कुश पासवान के नाम पर मुहर लगाई है।

बसपा सपा गठबंधन को 50 सीटों पर वाक ओवर

सूत्रों की माने तो कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की अस्सी में से लगभग 40 सीटों में यही रणनीति अपना कर भाजपा की कि शिकस्त की रणनीति बनाई है।कांग्रेस का यह दांव अगर सच्चा बैठा तो भाजपा को यूपी में करारा झटका लग सकता है। फिलहाल कांग्रेस के टिकट पर नजर रखिए और देखते रहिए कपिलवस्तु पोस्ट।

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