मधेसी नाकेबंदी से नेपाल में हाहाकार, काठमांडू, पोखरा से भाग रहे सैलानी

September 30, 2015 1:18 pm0 commentsViews: 270

नजीर मलिक

सोनौली बार्डर पर खड़े पेट्रोल के टैंकर और बीरगंज में नाकेबंदी करते संयुक्त मधेसी मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव

सोनौली बार्डर पर खड़े पेट्रोल के टैंकर और बीरगंज में नाकेबंदी करते संयुक्त मधेसी मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव

एक सप्ताह की नाकेबंदी ने नेपाल में खाने-पीने की वस्तुओं और पेट्रोलियम का संकट खड़ा हो गया है। इससे पश्चिम के पर्वतीय इलाकों में हाहाकार मचा है। राजधानी काठमांडू समेत तमाम टूरिस्ट इलाकों से सैलानी भागने लगे हैं।

राजधानी काठमांडू में डीजल, पेट्रोल तकरीबन खत्म है। वहां सिर्फ पाच दिन के लिए भंडार बचा है। पंपों पर लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं। कालाबाजारी भी चरम पर है। पेट्रोल तकरीबन दो सौ रुपये लीटर बिकने लगा है। सैलानियों के लिए डीजल पेट्रोल के बिना घूमना फिरना मुश्किल है। लिहाजा उनके पास घर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं है।

एशिया का स्वीजरलैंड कहे जाने वाले पोखरा समेत पालपा, श्रीनगर और चितवन की हालता भी ऐसी ही है। यह मधेसी दलों की नाकेबंदी का नतीजा है। नेपाल जाने वाले 90 प्रतिशत सामान मधेस बहुल इलाके से होकर जाते हैं। मधेसियों ने भारत की सीमा पर बने तकरीबन हर नेपाली बैरियर पर धरना देकर सामानों का प्रवेश बंद कर रखा है, जिसके कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है।

बताया जाता है कि नेपालगंज, कृष्णानगर, सोनौली, बीरगंज आदि बैरियरों पर मधेसी मोर्चा के लोग नजर रख रहे हैं। स्वयं मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव घूम-घूम कर इस मुहिम को आगे बढा रहे हैं। इसकी वजह से भारतीय बैरियरों पर सामान लदे हजारों वाहन खड़े हो गये हैं।

भारत से सामानों की आपूति नहीं हो पाने से सबसे ज्यादा दिक्कत नमक, सब्जी आदि की है। गुलमी के रहने वाले रमन विष्ट का कहना है कि दुकानों पर नमक की बहुत कम मात्रा बची है। पहाड़ के गांवों पर सब्जियों खास कर आलू का अभाव है। मिटृटी का तेल भी समाप्त हो चुका है। मोमबत्तियां भी बाजार में नहीं बची हैं।

नेपाल की जानकारी रखने वाले विमल थापा का कहना है कि स्थिति चिंताजनक है। अगर आयात के रास्ते कुछ दिन और नहीं खुले तो नेपाल में भारी उथल पुथल हो सकती हेै। फिलहाल र्प्याटन पर असर पड़ने से नेपाल को कई हजार करोड़ नुकसान की आशंका है।

दूसरी तरफ संयुक्त मधेसी मोर्चा के केन्द्रीय समिति के सदस्य सहसराम यादव का कहना है कि संविधान में मधेसियों के हित को जगह दिये बिना नाकेबंदी नहीं हटेगी। सरकार चाहे कुछ भी कर ले। जाहिर है संकट के और बड़ा होने की पूरी आशंका हेै।

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