फिर आतंक की राह पर कश्मीरी युवक

August 2, 2015 8:01 PM0 commentsViews: 104
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कश्मीर घाटी में दम तोड़ रहा आतंकवाद खाड़ी देशों से आ रहे हवाला के पैस से फिर फन उठाने लगा है। बड़ी संख्या में कश्मीर नौजवान जेहाद की राह पकड़ रहे हैं। बीते छह माह के दौरान 14 से 25 साल के आयु वर्ग के लगभग 50 लड़के आतंकी गुटों में शामिल हुए हैं। वादी के हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुल्लत और विभिन्न रक्षा विशेषज्ञ चेतावनी देते हुए कहते हैं कि यह भविष्य में समस्या पैदा करने वाली स्थिति है। राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हालांकि सार्वजनिक तौर पर यही कहते हैं कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। आतंकवाद अब समाप्त हो चुका है, लेकिन दबी आवाज में वे भी इस हकीकत को स्वीकार करते हैं। आतंकी नए लड़कों की भर्ती कर रहे हैं। दक्षिणी कश्मीर में त्राल, बाटापोरा, पंजगांव और यारीपोरा में हिज्बुल मुजाहिद्दीन पैठ बना रहा है, जबकि पलहालन से लेकर सोपोर तक में हिज्ब के साथ जैश व लश्कर अपने लिए लड़कों की भर्ती कर रहे हैं।

खुफिया सूचनाओं और पुलिस रिकार्ड के मुताबिक अवंतीपुरा से 15, कुलगाम से नौ, शोपियां से सात, अनंतनाग से आठ और उत्तरी कश्मीर से 11 व अन्य कस्बों से लगभग आठ लड़के लापता हुए हैं और यह सभी आतंकी बन चुके हैं और वादी में आतंकवाद का नेतृत्व इन्हीं लड़कों के हाथ में हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आज के समय और 1990 के दशक की शुरुआत के दौरान के आतंकवाद में फर्क यह है कि मौजूदा समय के आतंकियों की वैचारिक प्रतिबद्धता पहले के आतंकियों से कहीं अधिक है। इसके अलावा यह इस्लाम की एक कट्टरपंथी विचारधारा विशेष से ज्यादा प्रभावित है और खुद को पैन इस्लामिक मूवमेंट के साथ किसी न किसी तरीके के साथ जोड़कर देखते हैं। राज्य पुलिस के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आतंकवाद को जिंदा करने में हवाला कारोबार भी अहम रोल अदा कर रहा है। सरहद पार से नशीले पदार्थो की तस्करी के जरिए जुटाया जा रहा पैसा और खाड़ी देशों से आ रहा हवाला का पैसे का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को फिर से हवा देने के लिए हो रहा है। कुछ लोग इस सिलसिले में पकड़े भी गए हैं, लेकिन उससे यह नेटवर्क पूरी तरह तबाह नहीं हुआ है। राज्य के हालात पर नजर रखने वाले एक राजनीतिक विश्लेषक रशीद राही ने कहा कि भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार है। दोनों के राजनीतिक मुद्दे अलग-अलग हैं। अगर मुफ्ती सईद अलगाववादियों या आतंकियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई का निर्देश जारी करते हैं तो उन पर आरएसएस का एजेंट होने का आरोप लग जाता है।

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