भारतीय बेटियों के हक़ पर नेपाल ने चलाया हथौड़ा

August 7, 2015 12:41 pm0 commentsViews: 403
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नजीर मलिक 11111111111111111111
        नेपाली संविधान के नए प्रारूप के ख़िलाफ़ मधेसी पार्टियां बड़े आंदोलन की तैयारी में जुट गई हैं। 

“नेपाली संविधान के निर्माण पर सभी दलों में आम सहमति नहीं बन पाने की वजह से नए हालात पैदा हो रहे हैं। संविधान सभा द्वारा दो तिहाई बहुमत के आधार पर नए संविधान की घोषणा के आसार दिख रहे हैं। वहीं संविधान घोषणा की आंशका के मद्देनजर मधेसी पार्टियों में आंदोलन की रफ्तार तेज करने की आंशका बढ़ गई हैं। नेपाल के मधेसी समर्थक 19 राजनैतिक दल पुनः नए आंदोलन की तैयारी में हैं।”

नेपाल के उप प्रधानमंत्री प्रकाश मान सिंह ने कहा है कि नए संविधान में प्रांतों के सीमांकन और नामकरण जैसे अहम मुद्दों पर कई दलों में आम सहमति बन पाना संभव नहीं हैं। लिहाज़ा, इन हालात में दो तिहाई बहुमत के आधार पर जल्द ही नए संविधान की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख राजनीतिक दल प्रांतों की सीमाओं और नामों की जिम्मेदारी एक आयोग को देने और नए संविधान को घोषित करने के लिए 16 सूत्रीय समझौते पर तैयार हो गए हैं।

वहीं नए संविधान का बहिष्कार कर रही मधेसी पार्टियों की अहम मांगों में यह दोनों मुद्दे भी शामिल हैं। मधेसी पार्टियां दलितों और महिलाओं समेत अन्य समूहों के लिए ज्यादा अधिकारो की मांग कर रही हैं। नेपाल में मोटे तौर पर डेढ़ करोड़ नागरिक भारतीय मूल के हैं जिन्हें मधेसी कहा जाता है। नए संविधान में शामिल किए गए कई मुद्दाें से असहमत होकर यही मधेसी संगठन और दल आंदोलन कर रहे हैं।

इनकी कई अहम मांगों में से एक भारतीय महिला से शादी भी है। अगर नया संविधान पारित होता है तो नेपाली व्यक्ति से शादी के बावजूद भारतीय महिला नेपाली नागरिक नहीं मानी जाएगी। उसे केवल अंगीकृत नागरिकता ही मिलेगी जिसके दूरगामी नतीजे बेहद खतरनाक साबित होंगे। नए प्रावधान को संविधान में शामिल करने पर ऐसे दंपति के बच्चे नेपाल में किसी भी संवैधानिक पद पर नहीं पहुंच पाएंगे जबकि पहले ऐसा नहीं था।

भारत-नेपाल के सीमाई इलाकों में रहने वाले दोनों देशों के नागरिकों के बीच एक-दूसरे के यहां शादी करने की बेहद मज़बूत और पुरानी परंपरा है। मगर संविधान के इस नए प्रावधान से ना सिर्फ भारतीय मूल के नागरिकों के अधिकार में कटौती कर दी जाएगी बल्कि भारी राजनैतिक नुकसान भी उठाना होगा। इस प्रावधान की वजह से नेपाल में रह रहे तकरीबन डेढ़ करोड़ मधेसियों को दोबारा एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने की ज़मीन मिल गई है।

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