आचार संहिता पालन के नाम पर विपक्ष की घेरेबंदी में लगा प्रशासन, लोगों में गुस्सा

May 1, 2019 3:25 PM0 commentsViews: 1554
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— अब तक गठबंधन प्रत्याशी आफताब आलम पर पर पांच और कांग्रेस उम्मीदवार डा. चन्द्रेश  पर तीन मुकदमे कायम

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज संसदीय सीट पर  प्रशासन आचार संहित के पालन को लेकर आलोचनाओं के केन्द्र में है। विपक्षी प्रत्याशियों के खिलाफ धड़ाधड मुकदमें और प्रशासन द्धारा सत्ता पक्ष को पूरी छूट देने का आरोप हर दल लगा रहा है, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहा है। इसे लेकर जनाक्रोश बढ़ रहा है।

क्षे़त्र में चुनाव प्रचार को गर्म हुए लगभग एक सप्ताह हो चुका है। इस दौरान सरकार विरोधी मुख्य दलों के उम्मीदवारों के ऊपर आचार संहिता के उल्लंघन के कम से कम आठ मुकदमें दर्ज किये गये हैं। इसमें सपा बसपा के संयुक्त प्रत्याशी आफताब आलम के विरुद्ध पांच और कांग्रेस प्रत्याशी डा. चन्द्रेश के खिलाफ तीन मुकदमें दर्ज किये गये हैं। गठबंधन प्रत्याशी आफताब आलम तो खेसरहा में एक उद्घाटन समारोह में गये थे, लेकिन प्रशासन ने उसे बिना अनुमति की सभा बता कर आचार संहिता उल्लंघ्रन का मुकदमा कायम कर दिया।

इस बारे में आफताब आलम का कहना है कि सता पक्ष के लोगों का लम्बा लम्बा कारवां चलता है। यहां तक की पुलिस बूथों पर खडे होकर सत्ता पक्ष के लोग जनता के समक्ष भाषण करते हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना रहता है। कांग्रेश उम्मीदवार डा. चन्द्रेश उपाध्याय भी कहते हैं कि उन पर मुकदमा कायम कर प्रशासन ने साबित कर दिया है कि वह सत्ता के इशारों पर काम कर रहा है।

प्रशासन की इस नीति के खिलाफॅ आम आदमी भी नाराज है। सोशल मीडिया पर इस बारे में गुस्सा निकाला जा रहा है। सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है कि अगर विपक्ष के प्रत्याशियों पर गाड़ियों की अधिक संख्या को आचार संहिता का उल्लंघन मान कर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है तो पुलिस बूथ पर खडें होकर भाषण करना कहां से कानून सम्मत है? जनता में इस बात को लेकर रोष है।

प्रशासन के इस रवैये से लोगों में खीज इतनी है कि भवावेश में एक प्रत्याशी ने यहां तक कह दिया कि अगर पुलिस प्रमुख को सत्ता से इतना ही प्यार है तो उन्हें वर्दी उतार खुले आम मैदान में आना चाहिए। जाहिर है कि प्रशासन पर एक पक्षीय काम करने का आरो गंभीर है, लेकिन वो शायद हवा का रुख पहचानने में विफल है।

 

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