व्यवसायी दम्पत्ति की मौतः कहीं यह हत्या को अत्महत्या बनाने की साजिश तो नहींॽ
आत्महत्या करने वाले इतनी पीडाजनक मौत को नहीं चुनते, तड़प
कर मरने के बाजाये उनके पास जहर खाने का आसान विकल्प था
नजीर मलिक
सिद्धार्थनगर। साठ साल के दवा व्यवसायी मदन मोहन अग्रवाल द्वारा अपनी पत्नी की हत्या के बाद खुद का गला काटने की घटना पूरे कस्बे को हजम नहीं हो रही है। माता पिता से अलग रह रहे बेटे राहुल के अनुसार उनके पिता कर्ज में डूबे हुए थे। इसलिए उन्होंने आत्म हत्या की। पुलिस को मौके पर एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें आत्म हत्या की बात कही गई है। सुसाइड नोट की सत्यता की जांच भी ढेबरूआ थाने की पुलिस कर रही है। बढ़नी कस्बे के वार्ड म्बर 11 में एसबीआई के निकट गुरुवार की अलह सुबह यह घटना सामने आई।
इस मार्मिक घटना के बारे में अपराध मनोविज्ञान को समझने वाले एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी का कहना है कि आत्महत्या करने वाले जान देने के लिए इतने पीडाजनक तरीके से जान नहीं देते जैसा कि अग्रवाल दम्पत्ति के मामले में देखा गया है। दर असल गुरुवार की घटना के बारे में यह बताया गया की मदन मोहन अग्रवाल ने पहले अपनी पत्नी मंजू अग्रवाल को हथौडे से मार कर जान ली। यह आमानवीय तरीका है। दवा व्यवसाायी हाने की बजह से वह अपनी पत्नी को जहर देकर आसानी से मार सकते थे। लेकिन यह तरीका तो आश्चर्यजनक है। घटना के समय घर में बैठी उनकी पत्नी ने बचाव किया होगा, चीखी चिल्लाई होंगी। मगर सुबह का शांत वातावरण होने के बावजूद उनकी चीख चिल्लाहट किसी ने नहीं सुनी।
यही नही पत्नी के बाद अग्रवाल द्वारा खुद जान देने का तरीका तो और भी कठिन है। बताया गया है कि मदन अग्रवाल ने पत्नी को मारने के बाद खुद अपना गला धारदार हथियार से काटा। आत्महत्या करने वाले आम तौर से खुद को गोली मारते, चाकू घोंपते तो पाये जाते हैं, मगर शीशे के एक टुकड़े से मेहनत कर खुद का गला काटने की प्रकिया तो पूरी तरह अव्यहारिक है। शीशे से गला काटने में वक्त लगता है। इस दौरान गला काटने में असहनीय पी़ड़ भी होती है। ऐसे में उनके पास छत से कूदने अथवा जहर खाने का आसान विकल्प था। मगर उन्होंने यह रास्ता नहीं चुना, क्यों?
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मृतक दंपत्ति का बेटा राहुल उनसे अलग रहता था। घटना के दिन वह पिता जी को सुबह दूध देने गया था। तब यह घटना उसने देखा। मात्र उसके बयान पर ही इसे आत्महत्या नहीं माना जा सकता है। कातिल कोई और हो सकता है। घटना के पीछे सम्पत्ति विवाद भी संभव है।
बहरहाल सीओ शाहरतगढ़ सुजीत राय का कहना है कि पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। जांच में एक एंगिल संभावित हत्या का भी है। अब फोरेंसिक और पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही जांच असली दिशा में बढ़ पायेगी। जहां तक कस्बे वासियों का सवाल है तो अधिकांश लोग इसके पीछे सुनियोजित साजिश ही मान रहे हैं।






