लोग कमज़र्फ हैं, गाली पे उतर आते हैं, खुद पे अफसोस हुआ आपकी इज़्ज़त करके
— कवि सम्मेलन-मुशायरे में देर रात तक झूमते रहे दर्शक
— हिमांशी बावर के अशआरों ने युवाओं में मचाई हलचल
नज़ीर मलिक सिद्धार्थनगर।
पाँव नीचे की ज़मीं, भी नहीं अपनी लेकिन,
नशा तो अब भी यही है, कि ज़मींदार हैं हम’।
उपरोक्त पंक्तियां अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर डा. कलीम क़ैसर ने बीती रात शहर में आयोजित एक कवि सम्मेलन मुशायरे में पढ़ीं। ग़ज़ल का ये मुखड़ा समन्तवादी मानसिकता और समाज में बढ़ते अहंकार के खिलाफ प्रतिरोध था, जिसका लोगों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। यही कार्यक्रम का सर्वोच्च बिन्दू भी था। कवि सम्मेलन व मुशायरे में दिल्ली से आईं युवा दिलों की धड़कन हिमांशी बावरा ने अपने प्रेम और विरह की कविताओं से युवाओं का दिल जीत लिया। उन्होंने एक के बाद एक तमान रचनाएं पेश कीं। हिमांशी ने कहा-
‘हम तेरे शहर में आए तो ख़फ़ा मत होना,
तेरी चौखट पे न आयेंगे चले जाएँगे’
नेपाल से आये शायर साहिल कपिलवस्तुवी ने भारत-नेपाल सरहद पर आए दिन होने वाली कठिनाइयों को सामने रख सुर पढ़ा-
दोनों मुल्कों के हाकिम से इतनी गुज़ारिश है मेरी,
सख़्ती न बढ़ाएँ सरहद पर, आज़ाद रहे, आबाद रहे।
नेपाल के काठमांडू से आये वरिष्ठ कवि साकिब हारूनी का कहना था-
‘संग ए रहे जुनून को जानाँ किए हुए
बे ख़ौफ़ चल पड़े तहे दामाँ किए हुए’
अपनी बारी में शिवसागर सहर आज के सामाजिक और सियासी हालात पर इस प्रकार टिप्प्णी की-
‘आप कमज़र्फ़ हैं गाली पे उतर आते हैं’
ख़ुद पे अफ़सोस हुआ आपकी इज़्ज़त करके’
गोरखपुर से आईं डॉ. नुसरत अतीक ने समाज में बढ़ते धन के प्रभाव पर चोट करते हुए कहा कि-
‘कभी ज़रदार की महफ़िल में न जाएं वरना’
हैसियत देखके कुर्सी से उठा देंगे लोग।
कार्यक्रम में इसके अलावा शायरों में गुजरात से आये सावन शुक्ला, छत्तीसगढ़ से आईं किरन सोनी, सहित गुलाब मुंतज़िर, वत्सला अग्रवाल, शादाब शब्बीरी, संघशील झलक और नियाज़ कपिलवस्तुवती, उरूज यावर कमाल, ब्रह्मदेव शास्त्री पंकज ने भी अपनी रचनाओं से लोगों को नवाज़ा।
कार्यक्रम के बीच में तीन साहित्यकारों डॉ कलीम क़ैसर, साहब, नज़ीर मलिक व ब्रह्मदेव शास्त्री पंकज को सहित्य में उनके कई दशकों के योगदान देखते हुए लाइफ़ टाइम अचीवमेण्ट पुरस्कार सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर अब्दुल हफ़ीज़ जी एवं प्रोफ़ेसर बालगंगाधर जी द्वारा प्रदान किया गया।
देर रात तक चले मुशायरा/कविसम्मेलन में शहर के गणमान्य
अनूप छापड़िया, सिद्धार्थ अग्रवाल, श्रीचंद कश्यप, संतोष श्रीवास्तव, जावेद ख़ान, यावर कमाल, शफ़ीरकुर्रहमान, नज्मी कमाल,अतीउल्लाह ख़ान, राजेश शर्मा, प्रदीप वर्मा, धीरज गुप्ता, ब्रह्मदेव शास्त्री, सिद्धार्थ गौतम, पंकज पासवान,डॉ नौशाद आज़मी आदि उपस्थित रहे।





