राप्ती के बढ़ाव से प्रभावित गांवों की तादाद हज़ार से ऊपर हुई, कमिश्नर, डीआईजी ने किया दौरा

August 20, 2017 7:00 pm0 commentsViews: 461
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अजीत सिंह

मीडिया से बात करते कमिश्नर और पुलिस उपमहानिरीक्षक

सिद्धार्थनगर जिले की चार प्रमुख नदियां आज सुबह से स्थिर हैं, लेकिन राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते जिले के बाढ़ पीड़ित गावों की तादाद एक हज़ार से अधिक हो गयी है। बाढ़ की हालत खतरनाक होने के मद्दे नज़र मंडलके कमिश्नर व् डीआईजी ने भी आज बाढ़पीड़ित गांवों का दौरा कर हालात का जायज़ा लेने के बाद मीडिया से हुई बातचीत में राहत बचाव ला काम तेज़ करने का विश्वास दिलाया है।
प्रशासन की जारी प्रेसनोट के अनुसार ज़िले की राप्ती नदी में बढ़ाव लगातार जारी है। इसके अलावा बूढी राप्ती, बांनगंगा, कूड़ा और घोघी नदी घटाव पर है। परंतु सच ये है कि ये चारों नदियां घटने के बजाये स्थिर है।जिनमे भी बूढ़ी राप्ती धीमी गति से बढ़ ही रही है। प्रेस नोट के माध्यम से जिलाधिकारी ने माना की ज़िल में 643 गाँव बढ़ से प्रभावित हैं। लेकिन सच यह है कि बढ़ प्रभावित गाँव लगभग एक हज़ार है। तमाम गाँवों की रिपोर्ट प्रशासन तक अभी नहीं पहुंची है।

राहत की आस में अफ़सरों की राह देखते बाढ़ पीड़ित ग्रामीण

मौजूदा सैलाब से ज़िले की तीन लाख आबादी प्रभावित हैं। हज़ार पशु भी भूख प्यास से बेहाल है। कुल 75 हज़ार हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है। बढ़ से हुई क्षति का अनुमान काम से कम 3 सौ करोड़ रुपया आँका जा रहा है। ये वास्तविक अनुमान से कम ही है।खतरा अभी बरक़रार है। राप्ती नदी के निरंतर बढ़ाव और अन्य नदियों के साथी होने से ज़िले में खतरा अभी कायम है। रोज़ तबाही की नई इबारतें लिखी जा रही हैं। हालांकी प्रशासन मॉन कर चल रहा है कि 24 घण्टों में स्थिति सुधरने लगेगी, परन्तु यदि इस बीच बरसात हुई तो हालात बदतर होने से रोका नहीं जा सकेगा।

करीमपुर-मोहाँना मार्ग पर जमुआर नदी के पानी में डूबा पुल

राहत और बचाव का काम तेज़ी पर- कमिश्नर
इस बीच आज बस्ती मंडल के कमिशनर दिनेश सिंह और डीआईजी आर के साहू ने डीएम और एसपी के साथ बढ़ क्षेत्रों का दौरा करने के बाद पत्रकारों को बताया किरहत और बचाव का काम तेज़ कर दिया गया है। ज़िले में इस कार्य के लिए 280 नाव और 12 मोटर बोट लगाये गए हैं। हर पीड़ित परिवार को राशन वितरित किया जा रहा है। अब तक 4 हज़ार परिवारों को मदद दी जा चुकी है। बताते चलें कि ज़िले में बाढ़ पीड़ित परिवारों की तादाद लगभग 50 हज़ार है।

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