मध्य प्रदेश के बक्सवारा हादसे में 6 की मौत के बाद अरनी व हथपरा गांव में कोहराम

May 18, 2020 12:44 pm0 commentsViews: 444

— हादसे में हुई थी 6 की मौत और 11 हुए थे घायल

नजीर मलिक

इसी ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने से हुई थी मौत

सिद्धार्थनगर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में बक्सवारा के पास हुई टक दुघर्टना में मरने वाले 6 व्यक्तियों के घरों में अब तक कोहराम मचा हुआ है। अरनी गांव में पति पत्नी की अर्थियां जहां साथ उठेंगी, वहीं इटवा क्षेत्र के हथपरा गांव के एक ही घर से चार लोगों का जनाजा एक साथ अदा होगा।  लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि अरनी गांव में मृत दम्पत्ति के घायल बच्चे पूजा व कृष्णा का पालन पोषण कैसे होगा, क्यों कि अब घर में बच्चों की बुजुर्ग दादी अकेली बची हैं। उल्लेखनीय है कि सभी मरने वाले मुम्बई से ट्रक पर बैठ का आपने गांव लौट रहे थे, लेकिन मध्य प्रदेश में दो वाहनों की टक्कर में इतना बड़ा हादसा हो गया।

रह रह कर बेहोश हो रही दादी, दो अनाथ बच्चों को भला कैसे पाल सकेगी?

बताते हैं कि ट्रक हादसे में डुमरियरगंज तहसील के अरनी गांव के रामशरण यादव और उनकी पत्नी लीलावती की मौत हो गई जबकि उनके बच्चे कृष्णा और पूजा घायल हो गए। हादसे की खबर सुबह आठ बजे पहुंची तो गांव में कोहराम मच गया। हर कोई रामशरण की बुजुर्ग मां भानमती के घर दौड़ पड़ा। घर के बाहर भीड़ जुटती देख भानमती कुछ समझ नहीं पाईं। गांव के कुछ लोगों ने हिम्मत कर खबर बताई तो हाय मेरा बेटवा-बहुरिया चले गए कहते हुए पछाड़ खाकर गिरी और बेहोश हो गईं।

वह होश में आतीं, थोड़ी देर सुबकतीं और फिर बेहोश हो जातीं।

बुजुर्ग भानमती की हालत देख गांव वालों में चर्चा थी कि अब बिना बेटा-बहू कैसे जी पाएंगी। गांव वालों ने बताया कि रामशरण यादव अपने दो अन्य भाइयों के साथ मुंबई में शटर वेल्डिंग का काम करता था। इलाके के कुछ लोग गांव लौट रहे थे तो उनके साथ वह भी परिवार लेकर आ रहा था। तीनों बेटों के जाने के बाद भानमती दो बहुओं के साथ यहां अकेली थीं। दो दिन पहले काफी खुश थीं और गांव वालों को बता रहीँ थी कि रामशरण बहू और बच्चों को लेकर आ रहा है।

होश में आने के बाद बोलीं कि भगवान हमरे सामने बेटवा-बहुरिया चले गए अब हम कइसे जियब। सूनी आंखों से घर की दीवारें देखतीं और बुदबुदाने लगतीं कि अब रामशरण न अइहें। एसडीएम डुमरियागंज ने मौके पर पहुंच कर दुखी परिजनों को ढांढस बंधाया और बताया कि रामशरण दंपति का शव लेने के लिए मुंबई से उसके भाई रवाना हो चुके हैं। यहां से भी उनके शव और घायलों को लाने के लिए वाहन भेजे जा रहे हैं।

चार की मौत और 9 के घायल होने से टूट गये हैं मो. अली

दूसरी ओर इटवा तहसील के  हथपरा गांव के मंसूर अली, उनकी बेटी यासमीन, रिश्तेदार सलमा खातून उर्फ चिंकी मृत्यु और परिवार के नौ अन्य सदस्य अगर ट्रैवलर नहीं छोड़ते तो शायद आज सही सलामत होते। यह चर्चा गांव में लोगों के बीच दिन भर होती रही।

मंसूर अली के पिता मो. अली ने बताया कि लॉकडाउन बढ़ने पर बेटा मंसूर अली गांव के ही कादिर अली सहित कुछ अन्य लोगों ने मुंबई से घर लौटने के लिए ट्रैवलर बुक की थी। बुधवार को इस बस में मंसूर, कादिर अली के परिवार के साथ तीन अन्य लोग भी लौट रहे थे। बृहस्पतिवार को भोपाल में ट्रैवलर सड़क हादसा हो गया। कादिर और मंसूर के परिवारों ने ट्रैवलर ठीक होने का इंतजार नहीं किया और ट्रक से आगे की यात्रा करने का फैसला लिया। यह सब लोग ट्रक से लौट रहे थे कि सागर में ट्रक पलट गया। हादसे में मंसूर अली, उसकी बेटी यासमीन और कादिर की पत्नी सलमा खातून उर्फ चिंकी की मृत्यु हो गई। हादसे में मंसूर अली की पत्नी सहरु‌न्निसा, बेटा इरशाद अली, इरफान अली बेटी आलिया, शबनम और शबीना के साथ कादिर उनका बेटा अयान और बेटी शमा घायल हो गए।

गांव वालों का कहना है कि यदि ट्रैवलर नहीं छोड़ते तो देर से ही सही सही सलामत घर तो पहुंच जाते। इधर एसडीएम ‌त्रिभुवन प्रसाद हथपुरा पहुंचे। उन्होंने मृतकों के शव लाने और घायलों को बुलवाने के लिए ग्राम प्रधान अनुज चौधरी, भाई गुलाम रसूल और गांव के बख्श उल्लाह, तफ्सीर को वाहनों से भोपाल भिजवाया।

बारह साल पहले गए थे कमाने, आज आंखे बंद कर आ रहे वापस

मंसूर अली नाला सोपारा में जूता बनाने की फैक्ट्री में दैनिक मजदूरी करते थे और कादिर अली भायखला में भंगार (कबाड़) का काम करते हैं। यह दोनों ही करीब बारह साल पहले रोजी रोजगार की तलाश में मुंबई गए थे। काम चल निकला तो धीरे धीरे पत्नी बच्चों को भी वहीं बुला लिया था। बेटे की मौत से गमगीन मो. अली कहते हैं कि बारह साल पहले बेटे को नम आखों से इस उम्मीद के साथ ‌विदा किया था कि वह तरक्की करेगा। फफकते हुए बोले कि अगर मालूम होता कि आंखें बंद कर लौटेगा तो कभी जाने ही नहीं देता। परिजन और आसपास के लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे कि मंसूर नहीं तो उसकेे बच्चे तो जीवित हैं। मां सहरुन्निसा बेटे और पोती की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं, रह रह कर बेहोश होतीं, होश आता तो कहतीं कि अब इन बच्चों की परवरिश कैसे होगी हमारा बेटवा मंसूर धोखा देकर चला गया।

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