बांसी सीटः कड़े संघर्ष में फंसे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जयप्रताप सिंह

February 23, 2022 12:47 PM0 commentsViews: 1993
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मोनू दुबे के समर्थन में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की टीम भी मैदान में उतरी

नजीर मलिक


सिद्धार्थनगर। समाजवादी पार्टी द्वारा बांसी में मोनू दुबे जैसे नौजवान को टिकट देने के बाद लोगों ने शुरू में इस सीट पर सपा को कमजोर मान लिया था। मगर ज्यों ज्यों चुनाव प्रचार जोर पकड़ रहा है मोनू दुबे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप को बराबर की टक्कर देने की हालत में नजर आ रहे हैं। अब तो अनेक जानकार यह मानने लगे हैं कि इस बार जय प्रताप सिंह का अजेय किला दरकने के आसार बनते जा रहे हैं।

सात बार चुनाव जीतने वाले जय प्रताप सिंह जो वर्तमान में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हैं, जय प्रताप सिंह को अतीत में सपा के लालजी यादव टक्कर देने की कोशिश करते रहे। इस दौरान वे केवल 2007 में ही जय प्रताप सिंह को शिकस्त दे सके। इसके अलावा वह हर बार जय प्रताप से हारते रहे। बताते हैं कि लालजी के निरंतर हारने के कारण सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने एक नया प्रयोग किया और लालजी के स्थान पर नवीन कुमार उर्फ मोनू दुबे नामक एक युवा नेता को टिकट दिया। सपा सुप्रीमों के विचार से ब्राह्मण बाहुल्य इस सीट से मोनू दुबे को टिकट दिया जाना लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

शुरू में तो ऐसा लग रहा था कि मोनू दुबे को टिकट देना सपा के लिए घाटे का सौदा साबित होगा परन्तु पिछले 14 दिनों में मोनू दुबे की टीम जिस प्रकार ब्राह्मण मतदाताओं को एक जुट करने में कामयाबी हासिल कर रही है वह आश्चर्यजनक है। बांसी विधानसभा में ब्राह्मण मतदाता लगभग 12 प्रतिशत हैं। इसके अलावा मुस्लिम 19 और यादव 9 प्रतिशत को मिला कर सपा समर्थक वोटरों की एकमुश्त तादाद 40 फीसदी बैठती है। बता दें कि पहले ब्राहमण वोटों पर जय प्रताप सिंह का एकाधिकार माना जाता था। अब देखना है कि सपा नेता मोनू दुबे को प्रत्याशी बना कर उसमें कितनी सेंधमारी कर सकेगी।

मोनू दुबे का खतरनाक दांव और पेंच

इस सिलसिले में मोनू दुबे ने एक खतरनाक दांव मारा है। बताते हैं कि कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेता जो वर्तमान में अपने को घोर उपेक्षित महसूस कर रहे हें वे बांसी क्षेत्र में मोनू दुबे के समर्थन में उतर आये हैं। इनमें पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री एवं एआईसीसी के मेंम्बर रहे नर्वदेश्वर शुक्ल, पूर्व सांसद चन्द्रशेखर त्रिपाठी, आदि की टीम भी खुल कर मोनू दुबे के पक्ष में उतर आई है। इसके अलावा वरिष्ठ नेता डा. प्रमोद उपाध्याय, एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे कांग्रेस नेता अनवारुल हक भी उनकी मदद में उतर चुके हैं। जिससे मोनू दुबे की स्थिति मजबूत हुई है और वह लगाातार मजबूत होते जा रहे हैं। इस बारे में नर्वदेश्वर शुक्ल का कहना है कि हम ने कांग्रेस नहीं छोड़ा है। हम आज भी कांग्रेसी हैं। मगर बांसी में कांग्रेस बहुत कमजोर है। ऊपर से हमारी जम कर उपेक्षा भी हो रही है। इसलिए हमारे पास भाजपा को हराने के लिए मोनू दुबे से बेहतर विकल्प ही नहीं है।

बता दें कि मोनू के लिए लाभदायक स्थिति बनाने में राजनीतिक हालात भी साथ है। जिले में किसान युनियन बांसी क्षेत्र में ही मजबूत है। जय प्रताप सिंह के खिलाफ 10 साल को एंटी इनकम्बेंसी भी है। ऊपर से पूरे प्रदेश में ब्राह्मण समाज में सरकार के प्रति उपजी नाराजगी भी दिखती है। ऐसे में मोनू दुबे इस सीट पर कोई बड़ा उलटफेर भी कर दें तो ताज्जुब की बात नहीं होना चााहिए।

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