करोड़ों बहे, फिर भी टपका: चालू होते ही भीमापार रेलवे अंडरपास में भ्रष्टाचार का ‘लीकेज’
आजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ी विकास की योजनाएं कैसे जनता के लिए मुसीबत बनती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण भीमापार रेलवे अंडरपास है। करीब ₹6 करोड़ से भी अधिक की लागत से बना यह अंडरपास उद्घाटन होने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। दीवारों से रिसता सीवेज का पानी और तकनीकी खामियों के चलते इसका बंद होना चीख-चीख कर बड़े घपले की गवाही दे रहा है।
पहली ही परीक्षा में फेल, दीवारों से बह रहा सीवेज
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ। चालू होने के कुछ ही दिनों बाद अंडरपास की दीवारों से पानी का भारी रिसाव (सीपेज) शुरू हो गया। हालत यह है कि अंडरपास के अंदर सीवेज और भूमिगत पानी का जमाव होने लगा है, जिससे राहगीरों का निकलना भी दूभर हो गया है।
एक महीने में ही ताला, मरम्मत के नाम पर लीपापोती
अंडरपास में इतनी गंभीर तकनीकी खामी (Technical Fault) है कि इसे चालू होने के एक महीने बाद ही यातायात के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा। विभाग अब अपनी कमियां छिपाने के लिए मरम्मत का नाटक कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इसकी पूरी संरचना को सही नहीं किया जाता, तब तक यह रिसाव बंद नहीं होगा।
जनता में भारी आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग
करोड़ों रुपये पानी में बह जाने से क्षेत्र के लगभग दर्जन भर गांवों के निवासियों में भारी गुस्सा है। ग्रामीणों ने इस महाघोटाले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का साफ कहना है कि जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वाले भ्रष्ट इंजीनियरों और ठेकेदार पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए।





