राहुल गांधी का दबाव: भाजपा अपने 70 पार वरिष्ठ सांसदों का टिकट काटने के मूड में नहीं

February 26, 2024 1:42 PM0 commentsViews: 507
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राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा की आशातीत सफलता से भौचक है भाजपा,

शायद इसीलिए वह अपनी रणनीति में बदलाव का गंभीरता से कर रही विचार

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। इंडिया एलायंस की एकजुटता तथा राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ से भारतीय जनता पार्टी चकरा गई है तथा वह अपनी चुनावी रणनीति में परिवर्तन करने पर विचार कर रही है। इसकी नई रणनीति से भारतीय जनता पार्टी के उन सांसदों को राहत मिलेगी जिनके ऊपर टिकट कटने की तलवार लटक रही थी।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा के दौरान शहर दर शहर उमड़ती भीड़ को देख भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भौचक है। आगरा में जब राहुल के साथ् अखिलेश भी शामिल हुए तो उनके रोड़ शो और जनसभा में कांग्रेस सपा के ही नहीं बसपा और राष्ट्रीय लोकदल दल के झंडे भी लहरा रहे थे। जबकि राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन में जाने की बात कह चुके हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय लोकदल के झंडे के साथ रालोद कार्यकर्ताओं के यात्रा में शामिल होने का मतलब साफ है कि उन्हें जयंत चौधरी का भाजपा में जाना पसंद नहीं है। इसके अलावा बलिया, बनारस, आगरा मुरादाबाद में राहुल की  यात्रा में उमड़ी रिकर्ड तोड़ भीड़ ने यह संकेत दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए उतना आसान नहीं है जितना वह समझ रही है।

राहुल की न्याय यात्रा की सफलता को देख भारतीय जनता पार्टी अपनी रणनीत में बदलाव करने की सोच रही है। बताया जाता है कि इसके तहत अब पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता का टिकट नहीं काटेगी। जबकि पहले माना जा रहा था कि इस बार नागपुर से वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी और पीलीभीत से बरुण गांधी का टिकट काटा जा सकता है। ये दोनों नेता पार्टी  की नीतियों के खिलाफ अक्सर बोलते रहे हैं। यही नहीं पार्टी के जिन 71 सांसदों पर टिकट कटने का खतरा मंडरा रहा था, अब उन्हें भी जीवनदान देने का मन बनाया जा रहा है। अब केवल खराब छवि वाले सांसदों का ही टिकट काटने का विचार बन रहा है।

सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे रणनीति यह है कि यदि बडे नेताओं का टिकट कटा और साथ ही भारी तादाद में सांसदों का टिकट काटा गया तो उनकी नाराजी से जो नुकसान होगा वह राहुल की लोकप्रयिता से मिल कर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है। जबकि पहले यह मानना था कि राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी इतनी कमजोर है कि भाजपा चाहे जितने सांसदों का टिकट भी काट दे, जीत हर हालत में भाजपा की ही होगी। लेकिन राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश में यात्रा की धमक के बाद भारतीय जनता पार्टी के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई और उन्हें अपनी रणनीति में बदलाव करना पडा।

 

 

 

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