विश्लेषण-इस दम खम के बल पर सिद्धार्थनगर में सपा से कैसे लड़ सकेगी भाजपा

November 6, 2015 10:50 am0 commentsViews: 181
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नजीर मलिक

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सिद्धार्थनगर जिला पंचायत सदस्य के लिए हाल में हुए चुनाव में सपा ने भाजपा को धूल चटा दी है। समाजवादी पार्टी के नाकारेपन का सवाल उठा कर अगले विधानसभा चुनाव में सपा को परास्त करने का हुंकार भरने वाली भाजपा चुनाव नतीजों से सन्न है। सवाल है कि आखिर किस बल पर वह सिद्धार्थनगर में सपा की साइकिल पंक्चर करने के सपने देख रही है।

जिला पंचायत के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सिर्फ 9 सदस्य ही जीत कर आये हैं। 48 सदस्यों के लिए हुए चुनाव में इससे अधिक निर्दलीय जीते हैं। उनकी तादाद 12 है। दूसरी तरफ सपा के हाथ 24 जीत लगी है।

भारतीय जता पार्टी के विजेताओं की लिस्ट देखें तो ज्ञात होता है कि उनके कई सदस्य बडे नेताओं के परिवारों से हैं। जिनका अपने इलाकों में प्रभाव है। अजय सिंह ऐसे ही विजेता हैं।

इसी तरह पूर्व सांसद रामपाल सिंह ने अपने इलाके से अपनी बहू सुजाता सिंह को जिताने में कामयाबी हासिल की है, तो भाजपा के बड़े नेता हरिशंकर सिंह भी अपनी अनुज बहू पुष्पा सिंह को जिताने में कामयाब हुए हैं।
भाजपा के एक उम्मीदवार सिद्धार्थ गौतम कहते हैं कि भाजपा के पास इस चुनाव में वर्करों का मनोबल बढ़ाने के लिए कोई नेता ही नहीं था, जबकि सपा के पास नेताओं की फौज थी। भाजपा केवल पार्टी के नेताओं और कमल चुनाव चिन्ह के सहारे चुनाव जीतने का सपना देख रही थी।
दरअसल वर्तमान में जिले में भाजपा के पास जनाधार वाले नेताओं का अकाल है। सांसद जगदम्बिका पाल और विधायक जय प्रताप सिंह के अलावा और कोई प्रभावी चेहरा इस दल के पास नहीं है।

जगदम्बिका पाल की कद काठी बड़ी है। वह आम तौर पर स्थानीय चुनावों में बहुत अहम भूमिका निभाने से बचते हैं। दूसरी तरफ विधायक जय प्रताप सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर कम ही सक्रिय रहते हैं।

बाकी नेता और संगठन के किसी पदाधिकारी की कद काठी ऐसी नहीं है जो सपा के नेताओं की बराबरी कर सके। भाजपा के एक पदाधिकारी कहते हैं कि अब पार्टी को नये ढंग से सांगठनिक ताना बाना बुनना पड़ेगा, वरना आगे और बुरी होलत हो सकती है।

इस बारे में भाजपा के जिलाध्यक्ष नरेन्द्र मणि त्रिपाठी का कहना है कि भाजपा के दस से अधिक सदस्य जीत कर आये है। समाजवादी पार्टी ने सत्ता की ताकत का इस्तेमाल किया है। भय और प्रलोभन से स्थानीय चुनाव में भले बढ़त बना ली हो, मगर विधानसभा चुनाव का फलक बड़ा होता है। 2017 में भाजपा हर हालत में सपा को धूल चटा कर रहेगी।

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