गजब का कान्फिडेंस है नेताओं में, आरक्षण खुला नहीं चुनाव प्रचार शुरू

September 5, 2015 12:18 PM1 commentViews: 567
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नजीर मलिक

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“अब इसे नेताओं का कान्फिडेंस कहें या मोलभाव का असर? जिला पंचायत वार्डों के आरक्षण की घोषणा अभी तक हुई नहीं, लेकिन तमाम प्रभावशाली चुनावबाजों ने अपने पसंदीदा चुनाव क्षेत्रों में जोर शोर से प्रचार प्रारंभ कर दिया है”

जिला पंचायत क्षेत्र संख्या दस के आरक्षण की स्थिति क्या होगी, यह बाद की बात है। मगर इस क्षेत्र में बसपा नेता इसरार अहमद के पोस्टर चिपक गये हैं। वह कठेला क्षेत्र में जनसम्पर्क में डट गये हैं। उनके सैकड़ों समर्थक जनसम्पर्क अभियान में डट चुके हैं। डुमरियागंज तहसील के कादिराबाद-हल्लौर जैसे महत्वपूर्ण क्षे़त्र से कई दिग्गजों ने अपना अभियान शुरू कर दिया है। यहां से सपा के पूर्व जिला महामंत्री अफसर रिजवी, विधायक पुत्र इरफान मलिक, चर्चित नेता कसीम रिजवी स्व विधायक तौफीक अहमद के भाई चिन्ने मलिक आदि का सघन प्रचार चल रहा है।

अफसर रिजवी ने तो सोनखर मदारा आदि गांवों में बैठकें भी शुरू कर दी है। इसी प्रकार इरफान मलिक ने भी कादिराबाद, अगया, सोनखर आदि गांवों में लोगों से मिलना प्रारम्भ कर दिया है। दोनांे के समर्थक भी मैदान में उतर चुके हैं। क्षेत्र संख्या 43 से मनोज सिंह, अरविंद सिंह, डीएनमणि त्रिपाठी, रमजान अली जैसे दिग्गज भी इस क्षेत्र से मैदान में हैं। सबका चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है। शबीहुल हसन, प्रमोद यादव बेकर प्रधान, राजन सिंह, रमजान अली आदि चर्चित चेहरे भी अपने क्षेत्रों में प्रचार के लिए उतर चुके हैं।
मजे की बात है कि इनमें अधिकांश चेहरे सामान्य वर्ग के हैं।

शेष पिछडा वर्ग के। यह सभी बडे चेहरे जिन क्षेत्रों से लड रहे हैं, उनके आरक्षण की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हैं। लेकिन सबका विश्वास है कि घोषणा अन्ततः उनके मन मुताबिक ही होगी। आम ख्याल है कि ऐसा विश्वास रखने वालों को या तो अपने राजनीतिक चातुर्य पर भरोसा है, या कोई अंदरूनी वजह भी हो सकती है। सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र यादव कहते हैं कि बिना गुणाभाग के इस प्रकार का कान्फिडेंस संभव नहीं है। प्रशासन को इस पर गौर करना चाहिए। हालांकि प्रशासन किसी प्रकार के अंदरूनी गठजोड से इंकार करता है, लेकिन सवाल उठाने वालों की कमी नहीं है।

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