शोहरतगढ़ बसपा में बगावत के सुर, आखिर कौन है इस साजिश के पीछे?

May 8, 2016 10:47 AM0 commentsViews: 856
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नजीर मलिक

BSP

सिद्धार्थनगर। विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ में बसपा के कुछ लोगों ने बैठक कर नवागत बसपा नेता मो. जमील सिद्दीकी को टिकट दिए जाने पर विरोध जताया है, दूसरी तरफ पार्टी संगठन ने इसे हताश लोगों की साजिश करार दिया है। बसपा के जिम्मेदार इसे हताश लोगों का प्रलाप बता रहे हैं।

बसपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पार्टी कार्यालय पर बैठक कर जिलाध्यक्ष व कोआर्डिनेटर पर पार्टी के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शिवचन्द भारती ने बैठक की अध्यक्षता करते हुुए कहा कि पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी ने दलबदलू नेताओें से पैसा लेकर उन्हें प्रत्याशी बनवाया है,  जो संगठन के हित में नहीं है।

बैठक में कहा गया कि पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी लोक सभा चुनाव में बसपा के विरोध में प्रचार करते रहे हैं। ऐसे लोगों को प्रत्याशी घोषित कर निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। वहीं शोहरतगढ़ विधानसभा कमेटी के गठन मेें शामिल  80 प्रतिशत से अधिक लोग दल बदलकर पार्टी में आये हैं। ऐसे लोगों से पार्टी हित नहीं किया जा  सकता है।

बैठक में रामदास मौर्य, रामपाल गौतम,  चन्द्रकेश भारती,  राजूदास,  विजय कुमार,  राजेन्द्र प्रसाद,  रमेश तिवारी,  उमाशंकर राजभर,  सुशील खेतान, हरीराम भारती,  लवकुश सैनी,  दानबहादुर चैधरी सहित अन्य मौजूद रहे।

कौन है बगावत के पीछे?

सियासत की दुनियां में बसपा की पहचान कैडर बेस पार्टी की है। आम तौर से पार्टी के टिकट बदलने के फैसलों पर बसपा कैडर कभी विरोध नहीं करता। ऐसे में शोहरतगढ़ में दो-दो बार बागी गतिविधियां देख कर सवाल उठ रहा है कि इसके पीछे आखिर कौन हो सकता है।

बसपा के अंदरखाने की बात जानने वालों की माने तो इस सीट पर टिकट को लेकर कई बार हुए बदलाव के कारण यहां असंतुष्ट टिकटार्थियों की तादाद अधिक हो गई है। इस सीट से कुछ और लोग बसपा से चुनाव लड़ने की उम्मीद पाले हुए हैं।

बताया जाता है कि टिकट से वंचित कर दिये गये और टिकट पाने की उम्मीद में जी रहे कुछ नेताओं ने एक संयुक्त मोर्चा बना कर यहां विरोध को हवा देना शुरू कर दिया है। तटस्थ लोगों का मानना है कि अगर इस विरोध पर काबू नहीं पाया गया तो पार्टी का नुकसान हो सकता है।

इस बारे में बसपा जिलाध्यक्ष दिनेश गौतम का कहना है कि पार्टी से निकाल जा चुके कुछ लोगों की शह पर चंद लोग संगठन में दरार डालना चाहते है। ऐसे लोग बसपाई नहीं है। बसपा का हर कार्यकर्ता पार्टी के फैसले का स्वागत करता है। पार्टी से निकाले जा चुके लोग बसपा का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

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