लाल निशान से ऊपर गई बूढ़ी राप्ती, ग्रामीणों की धड़कनें तेज

September 18, 2022 12:42 pm0 commentsViews: 132
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अजीत  सिंह

सिद्धार्थनगर। बूढ़ी राप्ती नदी के लाल निशान पार कर जाने और राप्ती की तेज बढ़त से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की धड़कन तेज हो गई है। बूढ़ी राप्ती में बाढ़ से उसका क्षेत्र के हथिवड़ताल गांव के कई टोले पानी से घिर गए है। इटवा क्षेत्र में भी फसल डूब गई है।

नेपाल की पहाड़ियों समेत जिले में चार दिन से हो रही लगातार बारिश से नदियां उफान पर हैं। तेजी से बढ़ रही बूढ़ी राप्ती खतरे का निशान 85.650 मीटर पार कर 85.680 मीटर पर पहुंच चुकी है और अभी बढ़त पर है। वहीं राप्ती नदी ने भी रफ्तार पकड़ ली है और खतरे के निशान के करीब पहुंचने को आतुर दिख रही है। कूड़ा नदी के जलस्तर में भी वृद्धि हो रही है। इसके अलावा बानगंगा, घोघी नदी, जमुआर और तेलार के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हो रही है। नदी किनारे बसे ग्रामीणों में बाढ़ का भय सताने लगा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दो दिन और बारिश हुई तो जिले में बाढ़ से तबाही मचनी तय है। बूढ़ी राप्ती एवं राप्ती नदी की बढ़त से कई बांधों पर खतरा बढ़ गया है। उसका क्षेत्र के कई गांव के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, बानगंगा, बूढ़ी राप्ती व घोरही नदी का जलस्तर भी बढ़ने से शनिवार को बढ़नी ब्लाक के खैरी शीतल प्रसाद के खेतों में घोरही नदी का पानी फैल गया है और नकोलडीह जाने वाले मार्ग पर बाढ़ का पानी आ गया है। इससे टोले वासियों का आवागमन बाधित हो गया है। लोग जान जोखिम में डालकर टोले से बाहर आ रहे हैं।
ग्रामीण विनोद, पुजारी, जगराम, हरीश, राकेश यादव, राम सिंह, विजय सिंह के मुताबिक हर साल उन्हें बाढ़ का कहर झेलना पड़ता है और शासन-प्रशासन के अधिकारी केवल कागजी कोरम पूरा कर अपना काम खत्म कर लेते हैं। कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन बाढ़ से बचाव का स्थायी उपाय कोई नहीं कर पाया। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि नदियों के बढ़ रहे जलस्तर के साथ ही विभागीय लगातार निगरानी कर रहे है, संवेदनशील स्थिति से निपटने के लिए तैयारी की गई है।

खेतों में घुसा बाढ़ का पानी

बिस्कोहर। इटवा तहसील के पश्चिम-उत्तर स्थित परसोहन गांव के पास बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से आसपास खेतों में पानी भर गया है। किसान चंद्रिका प्रसाद यादव, राधिका यादव, राम बनारस पांडेय, मंतराम भारती, लवकुश ने बताया कि बूढ़ी राप्ती नदी तेज रफ्तार से बढ़ रही है। अगर नदी की बढ़त इसी तरीके से रही तो जो फसल सूखे से खत्म होने की कगार पर थर, वह बाढ़ में समाप्त हो जाएगी।
नदी का जलस्तर मीटर में

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