ANALYSIS: हिंदू युवा वाहिनी या राजपूताना रेजिमेंट?

August 21, 2015 1:11 pm3 commentsViews: 2167
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नज़ीर मलिक

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“पब्लिक को हिंदू राष्ट्र का हसीन सपना दिखाने वाली हिंदू युवा वाहिनी भीतर से बजबजा रही है। इस संगठन की राजनीति और आंतरिक ढांचा खंगालने पर पता चलता है कि असल में यह हिंदू युवा वाहिनी नहीं बल्कि ठाकुर वाहिनी है। मगर वर्चस्व और प्रभाव के लिए इस संगठन ने ख़ुद पर हिंदू धर्म का मुलम्मा चढ़ा रखा है। यही वजह है कि किसी ज़माने में हिंदू युवा वाहिनी की आवाज़ पर दौड़ लगाने वाले सवर्ण हिंदू अब संगठन को अलविदा कह रहे हैं। कमोबेश पूरे पूर्वांचल का यही हाल है।”

पूर्वी उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले में क्षत्रियों को छोड़कर ज़्यादातर सवर्णों की शिकायत है कि वाहिनी और संगठन के मुखिया योगी आदित्यनाथ उनके सवालों पर सक्रिय नहीं दिखते। संगठन की दरकती ज़मीन को महाराजगंज ज़िले की फरेंदा विधानसभा सीट में हुए उपचुनाव के नतीजों से भी समझा जा सकता है। सिद्धार्थनगर से सटे फरेंदा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे बजरंगी सिंह को अपराजेय समझा जाता था। वजह यह थी कि बजरंगी सिंह योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी हैं। मगर हालिया उपचुनाव में उन्हें करारी शिकस्त मिली। फरेंदा की पब्लिक ने सिर्फ योगी का क़रीबी होने के नाते उन्हें वोट देना ज़रूरी नहीं समझा। बजरंगी सिंह भी जाति से क्षत्रिय हैं।

इसी तरह सिद्धार्थनगर ज़िले की डुमरियागंज विधानसभा सीट से योगी ने अपने संगठन के प्रदेश प्रभारी राघवेंद्र सिंह को टिकट दिलवाया और जमकर प्रचार करने के लिए पहुंचे। मगर राघवेंद्र सिंह भी जीत की दहलीज़ पर नहीं पहुंच सके। कहा जाता है कि सिद्धार्थनगर ज़िले में वाहिनी के दो ही लीडर श्यामधनी राही और राघवेंद्र सिंह हैं। संगठन को लेकर राही अक्सर जनता के बीच देखे जाते हैं, बावजूद इसके उन्हें बीजेपी का टिकट नहीं मिला। श्यामधनी राही अनुसूचित जाति के हैं।

एक दौर था जब सिद्धार्थनगर ज़िला हिंदू युवा वाहिनी का गढ़ हुआ करता था। योगी आदित्यनाथ की जनसभाओं में एक आवाज पर भारी भीड़ जुटा करती थी लेकिन अब ऐसा नही है। श्यामधनी रही को छोड़ कोई भी बड़े कद वाला नेता ज़िले में सक्रिय नहीं है।

वाहिनी के प्रदेश प्रभारी और गत चुनाव में डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार राघवेन्द्र सिंह सक्रियता लगभग शून्य है। एक अन्य नेता सुभाष गुप्ता शोहरतढ़ नगर पंचायत की राजनीति से आगे बढ़ने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। जिला अध्यक्ष सुभाष गुप्ता कहते हैं कि इन दिनों वे गोरक्षा अभियान चला रहे हैं मगर मज़े की बात यह है कि ज़िले में उनका अभियान चलता हुआ नहीं दिख रहा।

आम सवर्णों का आरोप है कि वाहिनी सुप्रीमो योगी आदित्यनाथ का सजातीय नेताओं को ख़ास तरजीह देते हैं और बाकी सवर्णों के मसलों पर खामोशी बरतते हैं। यही कारण है कि वाहिनी नेताओं के पीछे चलने वाला झुंड भी अब छोटा होता जा रहा है। रतनसेन डिग्री कालेज बांसी की पूर्व विभागाध्यक्ष ज्योतिमा राय तो खुल कर कहती हैं कि महंतजी हमेशा से राजपूतों के प्रतीक रहे हैं। वह आम सवर्णों की समस्याओं को लेकर सड़क पर कभी नहीं उतरते हैं। वह केवल मजहबी आधार पर अपनी राजनीति की दिशा तय करते हैं और आम आदमी के सवाल भी टच नहीं करते।

सिद्धार्थनगर में सक्रिय सवर्ण समाज पार्टी के अध्यक्ष अवधेश मिश्रा सवालिया लहज़े में कहते हैं कि योगी आखिर आरक्षण के मुदृदे पर क्यों नही बोलते? एक सामान्य हिंदू का लड़का 80 फीसदी अंक पाकर भी ठोकरें खाने को मजबूर है। योगीजी को उनकी लडाई क्यों नही दिखती?

अवधेश मिश्रा खुलकर कहते हैं कि सवर्णों को धोखा देने का सबसे बडा मुखौटा हिंदू युवा वाहिनी है। वाहिनी के ज़िला प्रभारी भी बयान में अपनी शंका ज़ाहिर करते हैं। कपिलवस्तु पोस्ट से हुई बातचीत में वह कहते हैं कि हम बहुत भीतर की बात नहीं जानते। हमें सिर्फ इतना मालूम है कि योगीजी बड़े महंत हैं, सभी के बीच पूजनीय हैं और इस तरह की राजनीति से वह ऊपर उठे हुए हैं।

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3 Comments

  • badiya kam

  • Aadarsh Srivastava

    UP की जाति दललगत राजनीति से सभी वाकिफ़ है। पर दिलचस्प बात यह है कि वर्तमान यूपी सरकार हर विभाग में सजातीय लोगों का भर्ती करा रही , पक्ष ले रही है फिर भी पिछड़ो में उनका जनाधार किसी भी तरह कम पड़ता नहीं दिखाई देता।

  • m ismaeel khan

    you will find the reply in History. aditya nath himself a thakur and most of the thakurs of area came from rajputana and claims that they are the dissedents of Prithvi raj or Rana Pratap.after defeat by moghuls or other muslim rulers they fled to these trai beslts to hide in jungles/trai of devi patan tulsipur/bansi balrampur and in nepal as well. nepal naresh also belongs to sisodia vansaj. nepal raja helped britishers on the call of the raja of balrampur, Bansi & Betia.

    same the case with Muslims as well. many families of nawabs/jagirdars/taluqdars and armymen after lost of battle of lucknow fled deep in nepal and trai belt beyaond ghaghra.

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