लड़की से छेड़छाड़ के आरोपी को पुलिस ने बचाते हुए मात्र चालान किया, ‘बेटी पढ़ाओ’ का नारा तार-तार

January 31, 2024 1:05 PM0 commentsViews: 605
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नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। शासन द्धारा “बेटी पढ़ाओं, बेटी बढ़ाओ” का नारा दिया गया है। मतलब साफ है कि अगर किसी ने बेटियों के साथ कुछ आसामाजिक हरकत की तो सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।  मगर शोहरतगढ़ थाने के एक प्रभावशाली युवक द्धारा 14 वर्षीय एक बालिका के साथ्र छेडखानी ही नहीं किया बल्कि उसके शिक्षा के मार्ग में बाधा भी उत्पन्न की। बावजूद इसके पुलिस ने  पढ़ने वाली एक बालिका से निरंतर छेड़ छाड़ करने के आरोपी युवक के खिलाफ सक्षम कानूनों में मुकदमा दर्ज करने के बजाये उसे शांति भंग की आशका में चलान किया। जहां उसके जेल जाने से बचने की पूरी संभावना बन जाती है। मुकामी पुलिस के इस कदम से सरकार की मंशा की मंशा की धज्जियां उड़ती दिखाई देने लगी हैं।

बालिका के भाई द्धारा एसपी को दी गई शिकायत पत्र के मुताबिक में उसके गांव का आरोपित युवक धनवान है, वह काफी दिनों से उसकी बहन के पीछे लगा हुआ है। उसे हर प्रकार से छेड़छाड़ करता है। उसके साथ विभिन्न प्रकार के इशारे करता है। जब वह शौच करने जाती है तो वह वहां पहले से ही घात लगाकर पहुंच कर फोटो खींचता है, और गंदे इशारे करता रहता है।

उस  मनबढ़ युवक के भय से मेरी बहन स्कूल जाना तक छोड़ चुकी है तथा हर वक्त डरी व सहमी रहती है। जब आरोपित के घर वालों से इसके इस नाजायज हरकतों की शिकायत करने गए तो उसके समाज के लोग इकट्ठा हो गए और गांव में हमारे परिवार का मजाक उड़ाने लगे। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो मिटा देने की धमकी देने लगे। थाने पर गए तो वहां कोई सुनवाई नहीं हुई।
थाने पर आरोपित के खिलाफ सिर्फ शांतिभंग में चालान किया गया था। आरोपी एसडीएम कोर्ट पहुंचा तो वहां मेरी बहन पहुंचकर इसे सजा दिलाने के लिए कोर्ट में विरोध किया। लेकिन वहां सक्षम अधिकारी नहीं होने से उसे जमानत पर छोड़ दिया गया है।

एसप ने लड़की के भाई की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। लेकिन सवाल है कि लड़की के भाई की तहरीर पर कार्रवाई न कर मुकामी पलिस ने उसका शांति भंग में चालान क्यों किया? क्या सरकार की मंशा को तार तार करने वाली पुलिस भी दोषी नहीं है? खैर देखते हैं कि एसपी के आश्वासन के बाद आगे क्या होता है।

 

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