बसपा के कारण चिल्लूपार में बीजेपी की बढ़ सकती है मुश्किल
— बसपा ने बनाया अस्मिता चंद को चिल्लूपार से पार्टी उम्मीदवार
— सीएम योगी के गृह जनपद की है चिल्लूपार विधानसभा सीट
नज़ीर मलिक
गोरखपुर। जनपद गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा सीट के सियासी समीकरण में आये बदलाव के कारण वहां भाजपा मुश्किल में पड़ सकती है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का गृह जनपद में हुए इस राजनीतिक बदलाव को बहुत अर्थपूर्ण मन जा रहा है।
बताया गया है कि बहुजन समाज पार्टी ने भाजपा से टिकट अस्मिता चंद को पार्टी का प्रभारी बना दिया है। इसका अर्थ साफ है कि अस्मिता चंद ही वहां से बसा की प्रत्याशी होंगी। अस्मिता चंद क्षेत्र के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके श्वसुर क्षेत्र से विधायक और मंत्री तक रह चुके हैं। वह राजपूत जाती से आती हैं। ऐसे में बसपा द्वारा उन्हें अपने खेमे में ले आई बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि अस्मिता चंद के बसपा उम्मीदवार बनने से भाजपा के वोटबैंक में भयानक बंटवारा हो सकता है, जिसका सीधा फायदा सपा के संभवित उम्मीदवार विनेशनकर तिवारी को होगा।
बता दे कि गत चुनाव में चिल्लूपार सीट से लगभग 96 हज़ार वोटर पाकर भाजपा के राजेश त्रिपाठी जीते थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के विनय शंकर तिवारी को लगभग 80 हज़ार मत मिले थे। बसपा के पहलवान सिंह को भी 48 हज़ार के आसपास मत प्राप्त हुए थे।
जानकार बताते हैं तब हालात दूसरे थे। प्रथम तो पहलवान की उम्मीदवारी बसपा ने बहुत देर में घोषित की थी, जिसके कारण वह सजातीय मतों को गोलबंद कर पाने में नाकाम रहे। दूसरे 2022 के चुनाव में भाजपा तो लोकप्रिय थी ही, स्वयं सीएम योगी की भी लोकप्रियता शिखर पर थी। इसलिए राजपूत, सैंथवार व भूमिहार मत एकमुश्त बीजेपी को गये थे।
लेकिन इस बार हालात बदले हैं, अब न तो योगी जी की पहले सी लोकप्रियता है न ही बीजेपी की। दूसरे अस्मिता चंद स्वयं मजबूत राजनीतिक परिव से है जो उपरोक्त तीनों वर्गों के मतों में सेंध लगाने में सक्षम है, जानकार कहते भी हैं कि इधर सवर्णों में बीजेपी के प्रति नाराज़गी बढ़ी है ऊपर से छात्रों और युवाओं में भी गुस्सा है। इसका लाभ अस्मिता चन्द व सपा के विनय शंकर तिवारी को मिल सकता है।
चिल्लूपार में बीजेपी इस नई राजनीतिक घटना से चिंतित दिखती है। और संभावित डैमेज कंट्रोल से निपटने के लिए रणनीतियां बनाने में लगी है। अभी चुनाव में समय है, मगर मुख्य मंत्री के गृह जिले की इस राजनीतिक घटना ने चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में भजपा को चिंता में तो डाल ही दिया है।





