कपिलवस्तु विधानसभा के टिकट की रेस में सावित्री वर्मा आगे, रात में हो सकता है टिकट का एलान

February 4, 2022 4:31 PM0 commentsViews: 1282
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कांग्रेसी नेता दिनेश वर्मा की बहू है सावित्री वर्मा, कांग्रेस के महिला कोटे के कारण दिनेश वर्मा के बजाए बहू सावित्री वर्मा का मिला मौका

नजीर मलिक


सिद्धार्थनगर। ज़िले की सुरक्षित विधानसभा सीट कपिलवस्तु से कॉंग्रेस के टिकट के रेस में अचानक सावित्री वर्मा का नाम उभर कर आ गया है और वे रेस में सबसे आगे दिख रही हैं। आज देर रात तक उनके नाम का एलान हो जाये तो किसी को आश्चर्य नही होना चाहिए। खैर यदि सदर सीट से एक महिला प्रत्याशी उतरती है तो चुनाव बहुत रोचक हो जाने की संभावना है।

बताया जाता है कि कपिलवस्तु सीट से कांग्रेस के टिकेट की अंतिम संघर्ष में मात्र दो दावेदार दिनेश वर्मा व देवेन्द्र कुमार गुड्डू ही बचे थे,मगर आखरी वक्त में कांग्रेस आलाकमान ने महिला उम्मीदवार देने क मन बना लिया। पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि आनन फनन में इस सीट के लिए महिला उम्मीदवार की तलाश शुरू हो गई। इसी क्रम में टिकट के एक दावेदार दिनेस वर्मा की बहू सावित्री वर्मा का नाम उभर कर सामने आया और टिकट की रेस में अचानक सबसे आगे दिखने लगीं। सावित्री को टिकट मिलने की संभावना को इस बात से भी बल मिलता है कि अगर टिकट किसी पुरुष को ही देना होता तो अन्तिमम दौर में एक महिला को टिकेट के दावेदार के रूप में क्यों आगे बढ़ाया जाता।

सावित्री वर्मा एक परिचय
सावित्री वर्मा उर्फ सुधा वर्मा दिनेश कुमार वर्मा महामंत्री जिला कांग्रेस कमेटी की पुत्रवधू हैं। उनके पति का नाम राजा वर्मा है। उन्हें आगे बढाने का श्रेय श्वसुर दिनेश कुमार वर्मा और जिला कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल सिंह अनु बाबू को जाता है। जिनने पिछले 12 वर्षों से कड़ी मशक्कत कर कांग्रेस को जगाए रखा और कपिलवस्तु में अपनी पहचान कायम रखी। परिणाम स्वरूप देर से ही आए सर्वे में छन कर दिनेश कुमार वर्मा का नाम आया और “लड़की हूं लड़ सकती हूं” मिशन के तहत पार्टी ने उनके बहू के नाम का भी आकलन करवाना शुरू किया। इसे साफ आकलन किया जा सकता है कि अब कपिलवस्तु से दिनेश कुमार वर्मा अथवा बहू पर ही दांव लगा सकती है और अगर ऐसा हुआ तो भाजपा सपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय लड़ाई की संभावना भी बन जाएगी

बता दें कि दिनेश कुमार वर्मा 2019 से ही लगातार जनता के बीच में बने हुए हैं, तभी से वर्मा हर गांव में अपनी पहचान और पकड़ बना रहे थे। उन्होंने कपिलवस्तु विधानसभा सीट के पांचों ब्लॉकों के गांव के जग जलसा, शादी ब्याह, मरनी करनी, सूखा बाढ़ में पहुंचकर लोगों का दुख बांटने का प्रयास किया। यही नहीं तमाम गरीब कन्याओं के लड़कियों के शादी में इमदाद पहुंचाया। सन 2012 और 2017 में षडयंत्रकारी राजनीति के कारण वे अंतिम क्षणों में टिकट दौड़ से बाहर रहे। विषम परिस्थितियों के बावजूद दिनेश वर्मा कांग्रेस में आस्था रख कर पार्टी में बने रहे। लिहाजा कपिलवस्तु सुरक्षित सीट पर दिनेश कुमार वर्मा का नाम हर सर्वे में उभरकर आया। ऐसे पार्टी अगर यहां से प्रत्याशी चुनती है तो वह प्रत्याशी महिला लड़ाने की की नीति के तहत उनकी बहू सावित्री वर्मा को मैदान में उतर किती है।

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