लॉकडाउन का कहर: बांसी के शख़्स की हाथरस में मौत, दिल्ली से परिवार समेत मोपेड पर निकला था

March 31, 2020 1:34 pm0 commentsViews: 487
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नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर।लॉकडाउन की वजह से देशभर में दिहाड़ी मज़दूरों का पलायन जारी है. इस बीच दिल्ली की नवीन विहार कॉलोनी से यूपी के सिद्धार्थनगर ज़िले के लिए निकले एक शख़्स नवीन तिवारी की हाथरस पहुंचते-पहुंचते मौत हो गई. इस हादसे के बाद अफ़वाह फैल गई कि नवीन तिवारी मौत कोरोनावायरस के चलते हुई है. ऐसे में आसपास का कोई भी शख़्स शव के क़रीबन नहीं आया. हादसे के वक़्त नवीन तिवारी की पत्नी और दो बच्चे भी साथ थे. 15 हज़ार रुपए में एक किराए की गाड़ी से वो शव लेकर सिद्धार्थनगर पहुंचीं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विनोद तिवारी सिद्धार्थनगर की बांसी तहसील के रहने वाले थे. दिल्ली में वो परचून और चाय की दुकानों पर बिस्कुट, नमकीन सप्लाई करने का काम करते थे. लॉकडाउन का ऐलान होते ही सारी दुकानें बंद हो गईं और उनका काम भी रुक गया. इसके बाद विनोद तिवारी ने अपनी मोपेड से परिवार समेत घर निकलने का फैसला किया लेकिन हाथरस के सिकंदराराव क़स्बे तक पहुंचते-पहुंचते उनका दम निकल गया. मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि विनोद तिवारी मुंह के कैंसर से पीड़ित थे और दिल्ली में उनका इलाज भी चल रहा था.

दिल्ली में स्वतंत्र पत्रकार सत्येंद्र के मुताबिक ‘32 साल का तिवारी दिल्ली की नवीन विहार कॉलोनी में अपनी पत्नी व दो बच्चों के किराए के मकान में रहता था. बिस्कुट व कुरकुरे आदि सामान की सेल्समैनी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था.

लॉकडाउन के बाद काम बंद होने से आय का साधन समाप्त हुआ तो विनोद तिवारी शुक्रवार की देर रात्रि पत्नी व दो बच्चों को मोपेड पर बिठाकर यूपी के सिद्धार्थनगर घर के लिए चल पड़ा. अलीगढ़ के पास उसकी तबीयत बिगड़ी. वह मर गया.

न तो उसे मरने का शौक रहा होगा, न यह शौक रहा होगा कि गांव में जाकर कोरोना फैलाएं. दिल्ली में मर जाने की नौबत देखकर भागा होगा और आधे रास्ते में मर गया.

कहानी यहीं खत्म नहीं होती. उसके शव को कोई पहुँचवाने वाला नहीं था. अधिकारियों ने कहा कि यहीं जो करना हो कर दो. देर तक बच्चो को शव के पास बैठे देख एक मुस्लिम सब इंस्पेक्टर को तरस आई. उसने 15 हजार रुपये खुद देकर गाड़ी तय की.

कहानी आगे और भी है. इस कर्फ्यू में जो शव ले जाने का साहस दिखा पाए, वह दोनों भी नदीम और छोटे नाम वाले थे.’

हालांकि यह पहला मामला नहीं है जब लॉकडाउन के बीच किसी दिहाड़ी मज़दूर की पलायन के दौरान मौत हुई है. इससे पहले दिल्ली के एक रेस्तरां में डिलेवरी ब्वॉय का काम करने वाले रणवीर सिंह की आगरा में मौत हो गई. रणवीर दिल्ली से मध्यप्रदेश के मुरैना ज़िले के लिए निकला था.

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